होली क्यों मनाई जाती है संपूर्ण जानकारी

होली क्यों मनाई जाती है संपूर्ण जानकारी

मथुरा की होली
मथुरा की होली

क्या आप जानते हैं होली क्यों मनाई जाती है
तो चलिए जानते हैं आखिर होली क्यों मनाई जाती है होली का त्यौहार हमारे भारत देश का एक महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है इसकी कथा इस प्रकार है कि इसका उल्लेख हिंदू पुराण और विष्णु पुराण में भी मिलता है मान्यता है कि झांसी शहर से 80 किलोमीटर दूर एरच नाम का एक गांव है जोकि उस समय राक्षस राज हिरण्यकश्यप की राजधानी हुआ करती थी हिरण्यकश्यप को एक पुत्र था जिसका नाम भक्त प्रल्हाद था भक्त प्रह्लाद का नाम तो आप लोगों ने सुना ही होगा हिरण्यकश्यप को ब्रह्म देव का वरदान था कि वह ना ही किसी अस्त्र से ना ही किसी शास्त्र से ना ही रात में ना ही दिन में ना ही जमीन पर कहीं पर भी उसे मृत्यु प्राप्त नहीं हो सकती इसलिए वह तपस्या पूरी होने के बाद इस तरह का वरदान प्राप्त कर कर नगर वापस आकर नगर के सभी नागरिकों से कहता है कि आज से आप लोगों नारायण की पूजा बंद कर दीजिए और आज से तुम्हारा भगवान मैं हूं
कुछ दिनों बाद हिरण्यकश्यप की पत्नी को गर्भधारण हुआ और उसे लगा उसका पुत्र भी उसी के जैसा राक्षस और बलशाली होगा मगर हुआ इसका उलट जब उसकी पत्नी गर्भ से थी तब उसे नारद मुनि ने उसे विष्णु भगवान के कुछ उपदेश दिए और कथा सुनाई उसी कारण उसके गर्भ में पल रहे उसके बालक पर विष्णु भक्ति का प्रभाव पड़ा और उसके जन्म के बाद से ही वह विष्णु की भक्ति में लग गया 1 दिन हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र से पूछा कि तुम्हें क्या अच्छा लगता है तो उसने कहा कि मुझे नारायण का नाम स्मरण करना अच्छा लगता है इससे हिरण्यकश्यप क्रोधित हो गया और उसने अपने पुत्रों को ऋषि आश्रम में ज्ञान प्राप्ति के लिए भेज दिया वहां पर भी रहने के बाद उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा और वह नारायण भक्ति में लीन रहा जब ऋषि-मुनियों ने हिरण्यकश्यप को यह बताया कि आपका पुत्र नारायण की भक्ति में लीन है तो उसने अपने पुत्र की हत्या करने का निर्णय ले लिया
और अपने पुत्र को मारने के हर प्रयास किए सांपों द्वारा हाथी कुचल देना पहाड़ी से से फेंकने के द्वारा सैनिकों द्वारा तलवार भालू से मारना जहर देना इत्यादि सभी उपाय कर कर फिर भी भक्त प्रल्हाद नारायण का नाम स्मरण करते हुए बच जाता था उस पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता था

 होलिका का अंत कैसे हुआ 

होली त्यौहार

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यह सब देखकर हिरण्यकश्यप परेशान हो गया और उसने अपनी बहन होलिका की सहायता ली जिसे वरदान था कि वह आग में नहीं जल सकती होलिका ने कहा मैं इस पुत्र को लेकर आग में बैठ जाती हूं मुझे कुछ नहीं होगा आप तो जानते ही हैं कि मुझे वरदान है कि मैं आग में जाने के बाद भी मुझे कुछ नहीं होगा मगर यह बालक जलकर भस्म हो जाएगा मगर वह भूल गई थी यह वरदान से उसी के लिए था ना की भक्त प्रह्लाद के लिए क्योंकि वह तो विष्णु की भक्ति में लीन था ऐसा करने से इसका उलट हुआ भक्त प्रल्हाद बच गए और होली का जलकर उसका अंत हो गया यहीं से बुराई पर अच्छाई की जीत के स्वरूप में हमारे देश मैं होलिका दहन की शुरुआत हुई 

हिरण्यकश्यप का अंत कैसे हुआ

एक दिन हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को स्वयं ही मारने का प्रयास किया और उसने अपने पुत्र से पूछा कहां है तुम्हारा नारायण पुत्र ने कहा यहीं पर है आप में भी है मुझ में भी है इस हवा में भी है सभी जगह है तो उसने पूछा क्या इस खंभे में है तो भक्त प्रह्लाद ने बड़े ही प्रसंता से जवाब दिया हां इस काम में में भी नारायण है जब उसने अपने पुत्र को मारने का प्रयास किया तब नारायण भगवान ने स्वयं नरसिंह अवतार लेकर प्रकट हुए और अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का वध कर दिया
नरसिंह अवतार
नरसिंह अवतार

होली मनाने का वैज्ञानिक महत्व


उस वक्त से होली जलाने की प्रकाश शुरू हुई इसमें सबसे पहले खेत में निकले चने और गेहूं की बाली की आहुति दी जाती है यह हमारे देवता को आरती होती है और इसके बाद प्रसाद के रूप में लोगों को बांटा जाता है उसके बाद गेहूं जॉब आदि की कटाई की शुरुआत होती है
होलिका दहन का वैज्ञानिक कारण पूर्ण रूप से विज्ञान पर आधारित है शीत ऋतु से मौसम गर्मी की तरफ बढ़ता है इसके चलते मनुष्य के जीवन पर और आरोग्य पर कई परिणाम पढ़ते हैं जैसे कि हैजा सर्दी खासी चेहरे पर जलन फोड़ा फुंसी आदि घातक बीमारियों के द्वारा हमारे शरीर को घेर लिया जाता है
और कई घातक वायरस जैसी बीमारियों का आगमन होता है इन्हें हवा में ही खत्म करने के लिए होलिका दहन किया जाता है और वायुमंडल में स्थित इस प्रकार के कीटाणु और वायरस को एक ही दिन रात्रि के वक्त होलिका दहन के कारण खत्म कर दिया जाता है इसके अलावा जल्दी होलिका के परिक्रमा करने से हमारे शरीर में 40 फेरन हाइट इतनी ऊर्जा निर्माण होती है जिससे कि अगर किसी बीमारी या वायरस ने हम पर प्रभाव डाला तो उसे सहन करने की क्षमता हमारे शरीर में आ जाती है यह एक वैज्ञानिक कारण है


श्री कृष्ण भगवान द्वारा होली मनाने का क्या कारण है

बृज होली
राधा कृष्ण होली

कहा जाता है कि कृष्ण भगवान वैसे तो बचपन से बहुत ही नटखटी थे और आप लोगों को यह भी पता होगा कि उन्हें सभी गोपिया काला करे कर पुकार दिए थे इसी कारण एक दिन उन्होंने विचार किया कि क्यों ना होली के दिन इन सभी गोपियों को रंग लगाकर इन्हें भी मुझ जैसा काला कर दिया जाए उस उस दिन कृष्ण भगवान ने सभी गोपियों को रंगों से रंग दिया और उन्हें भी अपने साथ काला कर दिया उसी दिन से बृजवासी बृज धाम में होली का त्योहार बड़े आनंद से बनाते हैं और यह त्योहार करीबन 16 दिन तक चलता है और यहां पर देश विदेश से हमारे देश में होली का त्यौहार का आनंद लेने 15:00 16 दिन पहले ही हमारे देश में प्रवेश कर जाते हैं

इस प्रकार है होलिका दहन और होली त्यौहार मनाने की जानकारी आप लोगों को यह जानकारी कैसी लगी यह कमेंट कर कर बता सकते हैं 
अगर इस आर्टिकल में आप लोगों के कुछ प्रश्न रह गए हो तो आप लोग हमें कमेंट कर कर बता सकते हैं आशा करता हूं कि आप लोगों को यह जानकारी पसंद आई होगी
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Jay malhar tours
तो चलिए मिलते हैं अगले आर्टिकल के साथ कुछ नया लेकर तब तक के लिए जय हिंद जय भारत

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