रहस्य से भरा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर उज्जैन

रहस्य से भरा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन की संपूर्ण जानकारी


Mahakaleshwar jyotirlinga
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग


जय भोलेनाथ
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग यह हमारे भारत देश के मध्य प्रदेश के उज्जैन नगर में शिप्रा नदी के तट पर स्थित है इस शहर का प्राचीन नाम  अवंतिका  और आज का नाम उज्जैनी है  इसका उल्लेख  महाभारत में  शिव पुराण में भी मिलता है  यह मंदिर  भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों में से  एक है यह ज्योतिर्लिंग हमारे पृथ्वी का तीसरा ज्योतिर्लिंग कहलाता है

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उज्जैन शहर का महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग हमारे भारत देश का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो कि दक्षिण मुखी होने के साथ-साथ यहां पर रोजाना भगवान शिव को नींद से जगाने के लिए सुबह 4:00 बजे शमशान से लाई हुई चिता की ताजी राख से भगवान शिव की भस्म आरती की जाती है यह आरती तकरीबन 20 मिनट तक चलती है इसके साथ साथ भगवान शिव के साथ सिंगार किए जाते हैं और उन्हें दूध दही शहद फलों के रस और पंच अमरुद से उनका स्नान किया जाता है और उसके बाद इस ज्योतिर्लिंग को शंकर भगवान से महाकालेश्वर का रूप दिया जाता है
कहा जाता है कि अगर कोई भी इस भस्मा आरती को देखें तो उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती है और उसका जीवन  सुख और ऐश्वर्य से भरा हुआ होता है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है महाकालेश्वर को शमशान का देवता और अघोरियों का राजा भी कहा जाता है

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा


महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह हमारे पृथ्वी का सबसे प्राचीन तीसरा ज्योतिर्लिंग माना जाता है यह ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के प्राचीन नाम अवंतिका नगर में स्थित है
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहानी भारतीय मान्यता और आस्था पर आधारित है शिव पुराण के अनुसार कोटि रूद्र संहिता के 16 अध्याय में तीसरे ज्योतिर्लिंग करें बारे में सूत जी द्वारा इस कथा का उल्लेख है उसके अनुसार अवंतिका नगरी में एक वेद कर्म व्रत ब्राह्मण रहा करते थे जोकि शिव भगवान के परम भक्त थे और रोजाना यहां पर शिवलिंग की पूजा नित्य नियम से करते थे और उनकी इस भक्ति के फलस्वरूप उनके चार पुत्र थे जो कि बड़े ही तेजस्वी और माता पिता की आज्ञा मानने वाले थे जिनका नाम देव प्रिया, प्रिया मेघ ,संस्कृत ,सुव्रत ,था 
 उन दिनों रतन माल पर्वत पर दूषण नामक एक दैत्य ने आक्रमण कर दिया और उस असुर कोर ब्रह्मा से अजय तह का वरदान मिला था और उसके बाद उस असुर ने हजारों की सैन्य शक्ति के साथ साथ अवंती नगरी यानी कि आज का उज्जैन पर आक्रमण कर दिया और उसने चार दैत्य को और प्रस्तुत किया और उन राक्षस ने मिलकर अवंतिका नगरी में आतंक मचा दिया और कई ब्राह्मणों को और लोगों को मार दिया इसके कारण संपूर्ण ब्राह्मण और जनता भयभीत थे मगर वह चार भाई उससे नहीं डरे और वह लोग भगवान शिव की तपस्या में लग गए कुछ दिनों बाद भगवान शिव स्वयं उसी ज्योतिर्लिंग पर साक्षात प्रकट हुए  जिस ज्योतिर्लिंग की पूजा  उनके पिताजी करते थे और दूषण नामक दैत्य का और उन 4 दैत्य जिन्होंने आतंक मचा रखा है उनका वध कर कर अवंतिका नगरी के लोगों को उनके भय से मुक्ति दिलाई और उन चारों भाइयों को साक्षात दर्शन देकर उनसे कहा कि आप लोग कोई वर मांगो उन चारों भाइयों ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वह स्वयं दैत्य के संहार के लिए और अवंतिका नगरी के सुरक्षा के लिए यहां पर ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में हमेशा के लिए स्थापित हो जाए भगवान शिव ने उनकी प्रार्थना मान ली और हरदम के लिए अवंतिका में महाकालेश्वर के नाम से ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में स्थापित हो गए

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का प्राचीन इतिहास

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर




प्राचीन इतिहास के अनुसार कहा जाता है कि उज्जैन शहर का प्राचीन नाम अवंतिका था अवंतिका में इसवी सन 1107 से लेकर के 1728 तक यवन शासकों का शासन था इनके शासनकाल में अवंतिका की लगभग 4500 वर्ष पुरानी स्थापित हिंदुओं की प्राचीन धार्मिक परंपरा नष्ट हो चुकी थी परंतु  1690 में  मराठों ने मालवा क्षेत्र में  आक्रमण कर दिया और 1728 में अपना अधिपत्य स्थापित किया इसके बाद उज्जैन का खोया हुआ गौरव प्राप्त हुआ और हिंदुओं की नष्ट हो चुकी परंपरा को पुन्ना धार्मिक रूप से स्थापित किया गया अवंतिका शहर 1731 से लेकर के 1890 तक यह मालवा की राजधानी बनी रही और आगे चलकर राजा भोज ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार और विस्तार किया

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन कैसे जाए संपूर्ण जानकारी

उज्जैन ज्योतिर्लिंग
इंडियन रेलवे


महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन की यात्रा पर जाने से पहले आप लोगों को कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी है उज्जैन शहर रोड मार्ग से रेल मार्ग से और हवाई मार्ग से लगा हुआ है यहां पर आप किसी भी मार्ग से आसानी से आ सकते हैं उज्जैन के बाद वहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन इंदौर रेलवे स्टेशन है जो कि उज्जैन से 55 किलोमीटर की दूरी पर है इंदौर आने के बाद आपको वहां से बस सेवा लोकल ट्रेन सेवा टैक्सी आदि की सुविधा आसानी से मिल जाएगी अगर आप लोग भारत के बाहर से आ रहे हैं तो आप लोगों को इंदौर एयरपोर्ट तक फ्लाइट लेनी होगी इंदौर से आप आसानी से उज्जैन आ सकते हैं
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 उज्जैन पहुंचने से पहले एक महत्वपूर्ण जानकारी आप लोगों को पता होनी चाहिए अगर हम लोग उज्जैन आते हैं तो और हमने अगर भस्मारती नहीं देखी तो हमारी यात्रा का कोई अर्थ नहीं होगा और हम से बड़ा कोई बदनसीब नहीं होगा क्योंकि दूर-दूर से लोग यहां पर भस्मा आरती देखने के लिए आते हैं और भस्म आरती का क्या महत्व है यह हमने आपको ऊपर बताया ही है अगर आप लोग भस्मा आरती में शामिल होना चाहते हैं तो इसके लिए आपको महाकालेश्वर की ऑफिशल वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भस्म आरती के लिए रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होगा रजिस्ट्रेशन करने के लिए आपको आधार कार्ड दिखाना  अनिवार्य होगा  और दर्शन के लिए जाते वक्त भी  ओरिजिनल आधार कार्ड  साथ में ले जाना जरूरी है  और अभिषेक के लिए एक तांबे का लोटा  साथ में जरूर ले जाए जिस दिन का आपको रजिस्ट्रेशन अवेलेबल मिलता है उस दिन के हिसाब से आप लोग अपने टूर का प्लानिंग करें यह रजिस्ट्रेशन एक महीना पहले किया जाता है और उज्जैन में आने के लिए आपको कम से कम 2 दिनों के लिए रुकने के हिसाब से पूर्व प्लानिंग करें और आप लोग चाहे तो भस्मा आरती का रजिस्ट्रेशन उज्जैन आने के बाद भी दर्शन से 1 दिन पहले कर सकते हैं जिसका टाइमिंग सवेरे 10:30 बजे से लेकर के दोपहर के 2:50 तक होता है यह रजिस्ट्रेशन करने के बाद आपको शाम को आपके मोबाइल पर 5:00 बजे से लेकर के साथ बजे के बीच आपको एक एसएमएस आएगा जिसमें आपका भस्म आरती के लिए नंबर लगा है या नहीं उसका उल्लेख होगा अगर आपका नंबर भस्म आरती के लिए लग जाता है तो रात को 10:00 बजे तक टोकन नंबर बाटी जाते हैं वह टोकन नंबर लेकर सुबह 4:00 बजे भस्मा आरती शुरू होती है मंदिर प्रशासन के अनुसार स्थित जगह पर आपको उनके दिए गए वक्त अनुसार हाजिर रहना है भस्म आरती के लिए मंदिर के द्वार पर लोग रात 1:30 से लाइन में लगना शुरू हो जाती है इस बात का भी आपको ध्यान रखना है और दर्शन के लिए जाते वक्त आपको धोती पहनना और महिलाओं को साड़ी पहनना अनिवार्य है

उज्जैन में रात ठहरने के लिए कई धर्मशाला और उज्जैन महाकालेश्वर संस्थान द्वारा कई निवास स्थान और प्राइवेट होटल की भी व्यवस्था है और वह आपको आसानी से ₹400 तक आसानी से मिल जाएगी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर उज्जैन रेलवे स्टेशन से 2 किलोमीटर की दूरी पर है
 महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्रांगण में कई छोटे-बड़े मंदिर भी है उन्हें भी आपको भेट देना है जो कि बहुत ही सुंदर मंदिर है
आशा करते हैं कि आप लोगों को दी गई जानकारी पसंद आई होगी और आप लोगों की महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन जाने की इच्छा पूरी हो और आपकी यात्रा सफल हो अधिक जानकारी के लिए आप हमें कमेंट कर सकते हैं


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