श्रीशैलम मलिकार्जुन की कथा व इतिहास संपूर्ण जानकारी

श्रीशैलम मल्लिका अर्जुन की कथा वह इतिहास और कैसे जाएं संपूर्ण जानकारी

श्रीशैलम ज्योतिर्लिंग टेंपल
श्रीशैलम ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश


हमारे भारत देश में 12 ज्योतिर्लिंग है जिस जगह पर स्वयं भोलेनाथ प्रकट हुए उन जगह पर ज्योतिर्लिंग का निर्माण हुआ है हमारे भारत देश में ऐसे ही 12 ज्योतिर्लिंग है उनमें से एक महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग जोकि श्री शैलम मलिकार्जुन के नाम से प्रसिद्ध है जोकि 12 ज्योतिर्लिंगों में से दूसरे नंबर का ज्योतिर्लिंग माना जाता है

श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आंध्र प्रदेश के पश्चिम भाग में कुरनूल जिले के नल्ला मल्ला नामक जंगलों के मध्य श्रीशैलम पर्वत पर स्थित है यहां पर भोलेनाथ की पूजा मलिकार्जुन के नाम से की जाती है इस पर्वत पर भोलेनाथ के साथ साथ माता पार्वती भी विराजमान है भोलेनाथ के साथ साथ माता पार्वती के यहां पर होने के कारण वर्ष इस ज्योतिर्लिंग को मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कहा जाता है कारण कि माता पार्वती को मल्लिका के रूप में जाना जाता है और पिता भोलेनाथ को अर्जुन के नाम से यहां पर पूजा जाता है इसी प्रकार यहां पर माता पार्वती और पिता भोलेनाथ दोनों का एक साथ निवास होने के कारण इस ज्योतिर्लिंग को मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है 
और यह स्थान 51 शक्तिपीठों में से 1 शक्तिपीठ भी है

श्रीशैलम मलिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की कथा

श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग

श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग की शिव पुराण और महाभारत में भी उल्लेख है उनके अनुसार इसकी एक कथा है और यह कथा भगवान शिव के परिवार से संबंधित है इसी कारणवश मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इस पृथ्वी पर निर्माण हुआ माना जाता है कि भगवान शिव के पुत्र श्री गणेश भगवान अपने बड़े भाई कार्तिकेय से पहले विवाह करना चाहते थे जब उन्होंने यह बात अपने माता पिता को बताई तो माता पार्वती और स्वयं भोलेनाथ ने इस पर विचार करते हुए उनसे कहा जो भी तुम दोनों में से पृथ्वी के तीन परिक्रमा पूर्ण करके वापस आएगा उसका विवाह कर दिया जाएगा यह सुनते ही भगवान शिव के बड़े पुत्र जोकि कार्तिकेय है वह अपने मयूर पर सवार होकर तुरंत पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल गए और गणेश जी सोच में डूब गए कि मेरा वाहन तो मूषक है जो की बहुत धीमी गति से चलता है और मैं यह प्रतियोगिता कैसे जीत लूंगा तो उन्होंने कुछ वक्त विचार किया और उसके बाद उठकर अपने माता पिता के पास गए और उनकी पूजा की पूजा करने के बाद उन्होंने उनकी परिक्रमा करना शुरू कर दिया परिक्रमा पूर्ण होते ही गणेश भगवान ने माता पार्वती और पिता भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया और उनसे कहा कि मेरी यह प्रतियोगिता पूर्ण हुई और कहां की माता पिता की पूजा और परिक्रमा करने से ही मेरी पृथ्वी की परिक्रमा पूरी हो गई जितना पुण्य पृथ्वी की परिक्रमा करने में है उतना ही पुण्य माता-पिता की परिक्रमा करने में है यह कहते हुए भगवान शिव और पार्वती का आशीर्वाद लिया

भगवान शिव और पार्वती ने उन की चतुराई को देखते हुए खुश हुए और उनका विवाह रिद्धि सिद्धि के साथ करा दिया मगर इस बात से उनके बड़े पुत्र कार्तिकेय नाराज हो गए और वह वहां से चले गए कहा जाता है कि कार्तिकेय दक्षिण भारत में श्रीशैलम पर्वत पर चले गए जब माता पार्वती और भगवान शिव को इस बात की जानकारी लगी तो उन्होंने उन्हें समझाने बुझाने के लिए नारद जी को भेजा इसके बाद भी वह नहीं माने और उसके बाद स्वयं पार्वती माता और भगवान शिव स्वयं उनसे मिलने के लिए गए जब कार्तिकेय जी को यह पता चला कि माता और पिता उन्हें मिलने आ रहे हैं तो वह वहां से और दूर चले गए
कहा जाता है कि जब माता पार्वती और भगवान भोलेनाथ अपने पुत्र से मिलने आए तो वह उन्हें उस जगह पर नहीं मिले पुत्र मोह में माता पार्वती उसी स्थान पर अपने पुत्र की राह देखते हुए बैठ गई और भगवान शिव उसी जगह पर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो गए और इस प्रकार इस ज्योतिर्लिंग का निर्माण हुआ ऐसा माना जाता है

श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग 51 शक्तिपीठों में से 1 शक्तिपीठ है


श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग


और एक कथा यह भी है कि यह तीर्थ स्थान 51 शक्तिपीठों में से 1 शक्तिपीठ भी माना जाता है उसकी कथा इस प्रकार है कि जब माता सती के पति यानी कि भगवान भोलेनाथ का अपमान माता सती के पिता राजा दक्ष द्वारा किया गया तो उसके को क्रोध वॉइस माता सती ने आत्मदाह कर लिया और उनके जलते हुए शरीर को लेकर के भगवान भोलेनाथ तांडव करने लगे इस तांडव से संपूर्ण सृष्टि का नाश हो सकता था इसके कारण वश भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर के कई टुकड़े कर दिए और उनके शरीर के यह टुकड़े जिस जिस स्थान पर गिरे उन्हें आज शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है कहा जाता है कि श्रीशैलम इस स्थान पर माता सती के हॉट गिरे थे इसीलिए इस स्थान को एक का 51शक्तिपीठों में से 1 शक्तिपीठ भी कहा जाता है

श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग का इतिहास

श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग
श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग



माना जाता है कि आज से 500 साल पहले विजय नगर के महाराज कृष्णदेव राय यहां पर आए थे और उन्होंने इस मंदिर का निर्माण कराया और उस पर सोने की छत का भी निर्माण कराया और इसके 150 साल बाद महाराष्ट्र के छत्रपति शिवाजी महाराज स्वयं यहां पर दर्शन के लिए पधारे और उन्होंने यहां पर आने वाली यात्रियों के लिए रहने के लिए सभामंडप की स्थापना की



श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं संपूर्ण जानकारी


आंध्र प्रदेश ट्रांसपोर्ट
आंध्र प्रदेश ट्रांसपोर्ट


श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग हमारे भारत देश का 12 ज्योतिर्लिंगों में से और एक अकाउंट शक्तिपीठों में से एक पवित्र स्थान है यहां पर जाने के लिए देश के सभी राज्यों से बाय रोड आया जा सकता है मगर ट्रेन से आने के लिए श्रीशैलम मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशनों में कमबम नाम का रेलवे स्टेशन में जो कि इस तीर्थ स्थल से 60 किलोमीटर की दूरी पर है दूसरा रेलवे स्टेशन मारकापुर जो कि 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

 मगर इन रेलवे स्टेशनों पर गिनी चुनी ट्रेन रूकती है और यहां पर सभी ट्रेनें दक्षिण भारत की ही होती है उत्तर भारत और उत्तर जगहों से यहां पर आने के लिए सबसे सरल और सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन हैदराबाद है जहां से श्रीशैलम की दूरी 230 किलोमीटर है और हैदराबाद फ्लाइट से आने वाले लोगों के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि यह एकमात्र शहर है जहां पर देश विदेश के सभी जगह से हैदराबाद आया जा सकता है और हैदराबाद से श्रीशैलम की दूरी मात्र 230 किलोमीटर है श्रीशैलम जाने के लिए हमें रेलवे स्टेशन या फिर एयरपोर्ट से वहां की नजदीकी बस स्टैंड जिनका नाम जेबीएस बस स्टैंड और दूसरा एमजीबीएस बस स्टैंड है एमजीबीएस बस स्टैंड हैदराबाद रेलवे स्टेशन से 3 किलोमीटर की दूरी पर है यहां से आपको आंध्र प्रदेश स्टेट की सरकारी और प्राइवेट बस सेवा श्रीशैलम मल्लिकार्जुन के लिए डायरेक्ट मिल जाएगी जिसका किराया मात्र ₹380 प्रति व्यक्ति होगा

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श्री शैलम मलिकार्जुन पोस्ते ही आपको आपके रहने के लिए व्यवस्था करनी होगी चाहे तो आप ऑनलाइन भी कर सकते हैं यहां पर संस्थान द्वारा निर्मित यात्री निवास बनाए गए हैं जिनका नाम एसी का किराया ₹300 से लेकर के ₹700 तक है और एसी का किराया ₹700 से लेकर कि ₹1000 तक है आप लोग चाहे तो पातालगंगा रोड पर श्री धर्म और अंबिका और नीलकंठेश्वर के नाम से स्टेट यात्री निवास पर जा सकते हैं जहां पर आपको नॉन एसी रूम ₹ ₹150 और एसी रूम ₹250 और आप लोग चाहे तो ₹30 में आपको मेड भी उपलब्ध हो जाएगा जिसे आप नीचे डाल कर आराम कर सकते हैं

दर्शन करने से पहले आप लोगों को दर्शन का पंजीकरण करवाना अनिवार्य है उसके बगैर आपको दर्शन नहीं करने दिए जाएंगे आप लोग चाहे तो वीआईपी पास लेकर जोकि ढाई सौ रुपए में मिलता है जल्दी दर्शन कर सकते हैं या फिर फ्री दर्शन भी कर सकते हैं वह आपकी आस्था पर आधारित होगा भगवान मलिकार्जुन के दर्शन करने के बाद आप लोगों को ब्रह्मा देवी जोकि पार्वती सती के एक ही रूप है ब्रह्मा देवी के नाम से जानी जाती है जो कि एक शक्तिपीठ माना जाता है और यह हमारे भारत देश में 51 शक्तिपीठों में से 1 शक्तिपीठ के नाम से प्रसिद्ध है उनके भी दर्शन आप लोगों को करना जरूरी है
तभी आप की यह यात्रा सफल मानी जाएगी


उसके बाद आप लोग चाहे तो मंदिर से 10 किलोमीटर की दूरी पर है कृष्णा नदी जिसे पातालगंगा कहते हैं वहां पर जाकर स्नान कर सकते हैं और वहां से नजदीकी स्थित श्रीशैलम डैम पर भी जा सकते हैं

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