रहस्य से भरा ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर संपूर्ण कथा

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग की संपूर्ण जानकारी


 ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग
ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग

          




ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग हमारे भारत देश का ही नहीं बल्कि संपूर्ण पृथ्वी और सृष्टि के  12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के साथ-साथ पृथ्वी का चौथा ज्योतिर्लिंग माना जाता है यह ज्योतिर्लिंग हमारे भारत देश के मध्य प्रदेश राज्य में खंडवा जिले के अंतर्गत आता है खंडवा जिले में मोर्तक्का नामक गांव से इसकी दूरी कुल 14 किलोमीटर है यह ज्योतिर्लिंग मांधाता पर्वत पर नर्मदा नदी के किनारे और नर्मदा नदी की दो धाराओं के मध्य  मांधाता पर्वत पर स्थित है

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 इस पर्वत पर इस ज्योतिर्लिंग के चारों ओर पर्वत पर 7 किलोमीटर की परिक्रमा के लिए रास्ता बनाया गया है और उसका आकार ओम का होने के कारण इसे ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है और इस ज्योतिर्लिंग का असली नाम परमेश्वर ज्योतिर्लिंग है या फिर अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है इस परिक्रमा पर छोटे-बड़े कई मंदिर बनाए गए हैं और निशा की सुंदरता देखने लायक आश्चर्यजनक है और इसी पर्वत पर भगवान शंकर की 90 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा का भी निर्माण किया गया है और माना जाता है कि ओमकारेश्वर शिवलिंग के दर्शन करने के पश्चात जब तक आप इस परिक्रमा को पूरा नहीं करते तब तक आपकी यात्रा सफल नहीं मानी जाएगी 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह एक मात्र स्थान ऐसा है कि जहां पर भगवान शिव के दो शिवलिंग पाए जाते हैं एक पार्थिव शिवलिंग जिसे बनाया गया था और दूसरा शिवलिंग जहां पर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए इसकी कथा हम आगे देखेंगे


ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा

ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग


भगवान शिव की पृथ्वी पर प्रकट होने की कोई ना कोई कथा जरूर है उसी तरह इस ज्योतिर्लिंग की भी एक कथा है जिसके कारण आज भगवान शंकर इस स्थान पर स्वयं प्रकट होकर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए हैं
प्राचीन कथा के अनुसार और  शिव पुराण के  कोटि रूद्र संहिता में  18 वे अध्याय में  इसका उल्लेख मिलता है एक बार ऋषि मुनि नारद जी भ्रमण करते हुए विंध्याचल पर्वत की ओर गए और विंध्याचल पर्वत पर पहुंचते ही विंध्याचल ने उनकी पूजा की और उनका स्वागत किया और उनसे कहा मेरे पास किसी भी चीज की कमी नहीं है मैं सर्वश्रेष्ठ हूं उसी वक्त ऋषि मुनि नारद जी ने गहरी सांस ली उन्हें देखकर विंध्याचल ने कहा कि क्या हुआ क्या आप संतुष्ट नहीं है कि मेरे पास सब कुछ है तब नारद जी ने कहा इसमें कोई दोराय नहीं कि आपके पास सब कुछ है 


ओमकारेश्वर
ओमकारेश्वर




मगर आप सुमेरु पर्वत जैसे नहीं है उसकी चोटियां काफी ऊंची है मानो स्वर्ग को स्पर्श करती हो आप वहां तक कभी नहीं पहुंच सकते और यह कहते हुए ऋषि मुनि नारद जी वहां से चले गए उसके पश्चात विंध्याचल सोच में पड़ गए और उन्होंने मांधाता पर्वत पर जाकर भगवान शिव के एक पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया  और उसकी पूजा कर कर  करीब 6 महीने तक कठोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसन्न किया भगवान शिव ने एक दिन उन्हें साक्षत दर्शन देते हुए उनसे कहा विंध्याचल मैं तुम्हारी तपस्या से प्रसन्न हूं मांगो क्या वर मांगते हो तब विंध्याचल ने कहा प्रभु मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि मैं जिस कार्य को करना चाहूं उस कार्य को आसानी से कर सकूं भगवान शिव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें वह वरदान दे दिया उसी वक्त वहां पर कुछ ऋषि मुनि और देवगन  उपस्थित हुए और उन्होंने भगवान शिव की पूजा की और उन्हों ने भगवान शिव से जगत कल्याण के लिए उसी जगह पर हमेशा के लिए निवास करने के लिए और ज्योतिर्लिंग स्वरूप में विराजमान रहने के लिए विनंती की  और शंकर भगवान ने  उनकी यह विनती स्वीकार की और हमेशा के लिए मांधाता पर्वत पर उस पार्थिव शिवलिंग  के स्वरूप में  दो शिवलिंग  बन गए  और भगवान शिव  वहां पर  हमेशा के लिए ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो गए जिसे आज ओमकारेश्वर कहा जाता है
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एक और कथा के अनुसार यह भी कहा जाता है कि विंध्याचल नामक राजा ने भगवान शिव की तपस्या की ओर भगवान शिव ने उन्हें साक्षत दर्शन दिए और उनकी विनंती करने के कारण भगवान शिव इस जगह पर ज्योतिर्लिंग के स्वरूप में हमेशा के लिए विराजमान हुए यह सभी बातें तो पुराणों के अनुसार मानी जाती है और हमारी आस्था पर निर्भर करती है


ओमकारेश्वर कैसे जाएं संपूर्ण जानकारी

ओमकारेश्वर
ओमकारेश्वर


ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह स्थान भारत में मध्य प्रदेश राज्य के खंडवा जिले में स्थित है यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन ओमकारेश्वर रेलवे स्टेशन है यहां से मंदिर की दूरी कुल 12 किलोमीटर  है मगर इस मार्ग पर पैसेंजर ट्रेन चलती है फिलहाल में यह मार्ग छोटी लाइन होने के कारण बंद कर दिया गया है इसे बड़ा करने के लिए इसका काम जारी है कुछ दिनों बाद यह मार्ग पुनः चालू हो जाएगा तब तक आप लोगों को बस सेवा का ही सहारा लेना होगा उसके बाद यहां का नजदीकी रेलवे स्टेशन इंदौर है इंदौर शहर भारत के सभी राज्य मार्ग और हवाई मार्ग और ट्रेन मार्ग से जुड़ा हुआ है किसी भी माध्यम से आप डायरेक्ट इंदौर तक आसानी से आ सकते हैं और देश के बाहर से आने वाले लोगों के लिए इंदौर हवाई मार्ग से जुड़ा हुआ है इंदौर के लिए डायरेक्ट फ्लाइट मिल जाती है
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इंदौर से ओम्कारेश्वर की दूरी कुल 80 किलोमीटर है यहां से आपको निरंतर बस सेवा प्राइवेट टैक्सी सेवा आसानी से मिल जाती है प्राइवेट और सरकारी बस वाले इंदौर से ओम्कारेश्वर का 80 रुपए चार्ज करते हैं ओमकारेश्वर पहुंचने के बाद आपको 1 दिन वहां पर रुकना होगा या फिर आप लोग एक दिन में भी दर्शन कर कर वापस जा सकते हैं अगर आप लोग 1 दिन रुकना चाहे तो वहां पर सबसे बढ़िया महाराष्ट्र के संत श्री गजानन महाराज की सेवा संस्था द्वारा स्थित यात्री निवास का निर्माण किया गया है जहां पर आपको उचित दरों पर रहने के लिए रूम आसानी से मिल जाएगी और मात्र ₹35 में भरपेट खाना भी मिल जाएगा अगर आप लोग ओमकारेश्वर में रात गुजारना चाहते हैं तो पहली प्रधानता शेगाव संस्थान के इस आश्रम को जरूर दें और आपका बजट अच्छा है तो आप प्राइवेट होटल में भी रुक सकते हैं

बस वाला आपको बस स्टैंड पर छोड़ देगा वहां से आपको मंदिर जाने के लिए नर्मदा नदी के उस पार जाना होगा जिसके लिए आप पुल का सहारा भी ले सकते हैं या फिर नावसेभी जा सकते हैं नाव वाला ₹10 चार्ज करता है भगवान शिव के दर्शन करने से पहले आपको नर्मदा नदी में स्नान करना है और उसका जल लेकर शिवलिंग का अभिषेक करना है भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के पश्चात आप मांधाता पर्वत की परिक्रमा अवश्य पूर्ण करें दूसरे छोर पर स्थित आपको परमेश्वर ज्योतिर्लिंग की भी दर्शन करना है उसके दर्शन किए बगैर आपकी यात्रा सफल मानी जाएगी परमेश्वर ज्योतिर्लिंग और अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग एक ही माने जाते हैं क्योंकि जितना महत्व ओम्कारेश्वर ज्योतिर्लिंग को दिया है उतना ही महत्व परमेश्वर या फिर अमलेश्वर ज्योतिर्लिंग को भी दिया गया है

आशा करते हैं कि आपको यह जानकारी पसंद आई होगी अगर आपको यह जानकारी पसंद आए तो इसी तरह की जानकारी पाती रहने के लिए हमारे ब्लॉक पेज को फॉलो करें और हम आशा करते हैं कि आपकी ओमकारेश्वर की यात्रा सफल हो

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