रामायण की अनसुनी कहानी जो कभी नहीं दिखाई गई रामायण में

रामायण की अनसुनी कहानी 



रामायण
रामायण

रामायण हिंदू धर्म का और संपूर्ण जगत का एक धार्मिक ग्रंथ माना जाता है रामायण की रचना महर्षि कवि वाल्मीकि ने की थी संपूर्ण रामायण 2400 छन  और 7 अध्याय कांडों में विभाजित है जिनके सभी पहले अक्षरों को जोड़़़ दिया जाए तो उनसे गायत्री मंत्र तैयार होताा है यह एक दिव्यआत्मक रचना से कम नहीं
इसी प्रकार की कई सत्य बातें हमें आज तक टीवी पर सीरियल के माध्यम से या फिर फिल्म के माध्यम से नहीं दिखाई गई और यह बातें कई लोगों को पता भी नहीं है इसी प्रकार की जानकारी को आज हम जानेंगे

क्या था भगवान श्री राम की बहन का नाम

क्या आप जानते हैं कि भगवान श्रीराम को एक बहन भी थी महाराजा दशरथ के चार पुत्र और एक पुत्री हुई थी महाराजा दशरथ की पुत्री और भगवान श्री राम की बहन जिसका नाम शांता था मगर माता कौशल्या ने उसे अपनी बहन को गोद दे दिया जो कि अंग्रेज की महारानी थी इसीलिए प्रभु श्री राम की बहन शांता का उल्लेख रामायण में नहीं मिलता है

वनवास के दौरान लक्ष्मण जी 14 वर्षों तक क्यों नहीं सोए और उनकी पत्नी उर्मिला 14 वर्ष तक क्यों सोती रही

क्या आप जानते हैं कि भगवान प्रभु श्री राम जी को मिले 14 वर्ष के वनवास के दौरान लक्ष्मण जी 14 वर्षों तक क्यों नहीं सोए असल में लक्ष्मण कोई और नहीं बल्कि भगवान विष्णु के वाहन शेषनाग हैं जिन्होंने भगवान श्री राम के साथ-साथ पृथ्वी पर लक्ष्मण के रूप में भगवान श्री राम की सेवा करने के लिए  अवतार लिया है
जब प्रभु श्री राम लक्ष्मण और माता सीता वनवास के लिए निकले तो उन्होंने अपनी पहली कुटिया चित्रकूट में बनाई और भगवान श्री राम के विश्राम करने के पश्चात वह एक पेड़ के नीचे बैठे और उन्होंने निद्रा देवी का आह्वान किया निद्रा देवी ने उन्हें दर्शन दिए और लक्ष्मण जी ने उनसे वरदान मांगा कि वह अपने बड़े भैया प्रभु श्री राम की सेवा करना चाहते हैं इसलिए 14 वर्षों तक ना सोने का वरदान मांगा निद्रा देवी ने कहा कि मगर तुम्हारी हिस्से की नींद किसी और को लेनी होगी तो उन्होंने कहा कि मेरे हिस्से की नींद मेरी पत्नी उर्मिला को दे दीजिए जिसके कारण वर्ष लक्ष्मण जी 14 वर्ष तक भगवान श्री राम की सेवा करते हुए जागते रहे और उनकी पत्नी उर्मिला 14 वर्षों तक सोती रही

लंकापति रावण के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी


रावण
रावण

रावण भगवान शिव का परम भक्त था उसने कई वर्षों तक भगवान ब्रह्मा की तपस्या की थी और वरदान के स्वरूप में उसने भगवान और ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था कि कोई भी भगवान उसकी हत्या ना कर सके
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रावण एक दिन भगवान शिव के दर्शन के लिए कैलाश पर्वत पर गया रास्ते में उसे नंदी जी मिले नंदी जी ने पूछा कि आप कहां जा रहे हैं घमंडी रावण ने नंदी जी को वानर रूपी प्राणी कहां कर उनका उपहास उड़ाया और कहा कि मैं लंकापति रावण हूं भगवान शिव का परम भक्त हूं तुम मेरे मार्क से हट जाओ क्रोधित होकर नंदी जी ने उन्हें श्राप दिया कि जिस स्वर्णा लंका पर तुम्हें इतना गर्व है उस लंका का और तुम्हारे अंत का कारण एक वानर ही होगा और फिर वहां पर भगवान शिव प्रकट हुई और उन्होंने कहा कि नंदी का श्राप अवश्य पढ़ना होगा और उसके कारणवश भगवान शिव ने ही हनुमान के रूप में पृथ्वी पर जन्म लिया


अशोक वाटिका में कई दिनों तक बैठी रही माता सीता को रावण हाथ क्यों नहीं लगा सका
माता सीता अशोक वाटिका
माता सीता अशोक वाटिका


रावण माता सीता का हरण कर कर लंका की अशोक वाटिका में ले आया और माता सीता एक वृक्ष के नीचे कई दिनों तक बैठी रही मगर दोस्त रावण उन्हें हाथ नहीं लगा सका कारण की रावण को एक श्राप मिला था जानते हैं वह शराब क्या था कहा जाता है कि रावण अपने दिग्विजय के दौरान जब स्वर्ग लोक गया तब उसे रंभा नाम की एक अप्सरा मिली रावण ने जैसे ही उसे देखा वह उस पर मोहित हो गया और उसे छूना चाहा मगर रंभा ने कहा कि क्षमा करें महाराज मैं आपके भाई कुबेर के पुत्र नल कुबेर के लिए आरक्षित हूं और इस नाते मैं आपकी पुत्रवधू हूं मगर फिर भी वह नहीं माना तभी वहां पर नल कुबेर ने आकर रावण को श्राप दे दिया कि अगर तुम किसी भी स्त्री को उसके इच्छा विरुद्ध हाथ लगाओगे तो तुम्हारे सिर के सौ टुकड़े हो जाएंगे इसी कारणवश  रावन माता सीता को कभी हाथ नहीं लगा पाया

भगवान श्री राम ने बाली को छुपकर क्यों मारा था

भगवान श्रीराम ने क्यों मारा था बाली को छुपकर

बाली ने कई वर्षों तक भगवान ब्रह्मा की तपस्या की थी और भगवान ब्रह्मा ने उसे साक्षात दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा था तब बाली ने भगवान ब्रह्मा जी से यह वरदान मांगा था कि कोई भी व्यक्ति अगर उसके सामने युद्ध के लिए आए तो उसका आधा बल और शक्ति उसे मिल जाए ब्रह्मा जी ने उसे वह वरदान दे दिया इसी कारणवश बाली जिस से भी युद्ध करता था उसकी आदि शक्ति बाली के अंदर अपने आप आ जाती थी इसी कारणवश भगवान श्रीराम को उसे छुपकर मारना पड़ा था

भगवान श्रीराम ने किन-किन अस्त्रों का प्रयोग किया था और रावण का अंत किस अस्त्र से किया था

भगवान श्री राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास के समय और युद्ध के समय कई अस्त्र का उपयोग किया मगर उनमें से कुछ महत्वपूर्ण अस्त्र इस प्रकार थे
 जैसे राक्षस ताड़का का वध करने के लिए वज्रअस्त्र का उपयोग किया गया रामायण के अनुसार कहा जाता है कि ब्रह्मास्त्र का उपयोग 4 बार किया जिसमें प्रथम बार जब पंचवटी में रावण के पुत्र जयंत राक्षस एक कवि के रूप में आया और माता सीता के पर्व में चोट मारी तभी भगवान श्रीराम ने एक घास के तिनके को एक ब्रह्मास्त्र के रूप में छोड़ा और उस अस्त्र ने उस कौवे का पीछा तीनो लोक तक नहीं छोड़ा तब वह वापस भगवान श्री राम के चरणों में आया और इंद्र देव की प्रार्थना करने पर ही भगवान श्रीराम ने उसे छोड़ा और उसकी एक आंख फोड़ दी
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दूसरी बार ब्रह्मास्त्र का उपयोग समुद्र पर राम सेतु बनाने के वक्त समुद्र को सुखाने के लिए भगवान श्रीराम ने ब्रह्मास्त्र का आह्वान किया मगर वह समुद्र पर चला या नहींंंं तीसरी बार खर दूषण नामक दो राक्षसों के वध के लिए ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया गया और चौथी बार रावन पर ब्रह्मास्त्र का उपयोग किया और उससे पहले  उसके नाभि में स्थित अमृत्वव को खत्म करने के लिए  अग्निअस्त्र से रावण के नाभि में स्थित अमृत को जलाकर नष्ट कर दिया उसके बाद वह एक साधारण मनुष्य रह गया
उसके बाद गंधर्व अस्त्र का उपयोग किया गया जिससे भगवान श्रीराम ने रावण के 10000 रत 18008 हाथी और कई हजारों की राक्षसी सेना को मार गिराया

इस अस्त्र से हुआ रावण का अंत



और सबसे अंत में रावण का अंत करने के लिए ब्रह्मास्त्र का एक अलग ही रूप सामने आया जब रावण ने भयानक माया उत्पन्न  की और कई दिव्यास्त्र से प्रभु श्रीराम पर आक्रमण किया तब भगवान श्रीराम ने अपने तुनीर में से एक बान निकाला जिसका पंख सोने का था और उसे कई मंत्रों से वैदिक किया जिसमें ब्रह्मास्त्र का मंत्र और ब्रह्मादंड का अभी मंत्र और इंद्रास्त्र का मंत्र था इन मंत्रों के चलते एक अलग ही रूपी ब्रह्मास्त्र का निर्माण हुआ जिसे देखने संपूर्ण देवता पृथ्वी पर आए और उसी अस्त्र से भगवान श्री राम ने रावण का अंत किया
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