काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग वाराणसी के अद्भुत रहस्य

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर के अद्भुत रहस्य


काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग
काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग


काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर हमारे भारत देश का और संपूर्ण पृथ्वी के 12 ज्योतिर्लिंग में से 1 ज्योतिर्लिंग है और यह पृथ्वी का सातवा अद्भुत ज्योतिर्लिंग कहलाता है


काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर हमारे भारत देश में उत्तर प्रदेश राज्य के वाराणसी शहर मैं गंगा नदी किनारे स्थित है इसे कई अन्य नामों से भी जाना जाता है जैसे कि काशी, वाराणसी ,बनारस ,आदि और इसका प्राचीन नाम

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काशी विश्वनाथ हमारे भारत में भगवान शिव के भक्तों के लिए एक आस्था का केंद्र बना हुआ है और यहां पर भगवान शिव को वाम रूप में पूजा जाता है और साथ ही माता पार्वती को अन्नपूर्णा देवी के रूप में पूजा जाता है कहा जाता है कि काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन मात्र से मनुष्य को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है

आखिर कितनी पुरानी है काशी नगरी


काशी विश्वनाथ टेंपल
काशी विश्वनाथ टेंपल


कहा जाता है कि काशी शहर उतना ही पुराना है कि जितनी यह पृथ्वी कहा जाता है कि प्रलय आने के बाद भी यह जगह कभी नष्ट नहीं होगी कारण भगवान शिव स्वयं प्रलय आने के बाद काशी नगरी को अपने त्रिशूल पर धारण कर लेते हैं अगर ऐसा होता है तो यह एक अद्भुत चमत्कार ही है कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं और उनके परिवार के रहने के लिए काशी का निर्माण किया था और भगवान शिव उनके परिवार सहित स्वयं यहां पर साक्षात रहते हैं काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के मंदिर का जीर्णोद्धार इंदौर की महारानी अहिल्यादेवी होलकर में 1780 में किया था और महाराज रणजीतसिंह ने  इस मंदिर पर  सोने का कलश चढ़ाया मगर यह बताना मुश्किल है कि काशी नगरी कितनी पुरानी है इस काशी नगरी के प्राचीन होने का उल्लेख हमें महाभारत और रामायण से मिलता है क्योंकि महाभारत और रामायण को घटे कितने वर्ष हो गए हैं आप लोगों को पता ही होगा कि इन्हें घटे हुए है आज से करीब 9000 वर्ष हो चुके हैं ऐसा कहा जाता है और महाभारत और रामायण में काशी नगरी का उल्लेख मिलता है इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि काशी शहर कितना पुराना हो सकता है

काशी को मोक्ष की नगरी क्यों कहते हैं और कैसे मिलता है यहां पर मरने वालों को मोक्ष



काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की स्थापना किसी ने तपस्या कर कर नहीं की बल्कि भगवान शिव स्वयं यहां पर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हुए काशी शहर को मोक्ष का द्वार भी कहा जाता है कहा जाता है कि यहां पर माता सती के कान का कुंडल मणिकर्णिका घाट  पर गिरा था और यह स्थान 1 शक्तिपीठ के रूप में भी पूजा जाता है और आज यह स्थान एक श्मशान घाट के रूप स्थित है कहा जाता है कि यहां पर मरने वाले के कान में स्वयं भगवान शिव तारक मंत्र कहते हैं और उस व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है

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कहा जाता है कि भगवान शिव के 11 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करने से जितना पुण्य नहीं मिलता है उतना पुण्य काशी विश्वनाथ के एकमात्र ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने से मिल जाता है यह ज्योतिर्लिंग काले और चिकने पत्थर का बना हुआ है यहां पर भगवान शिव की दिन में 5 बार आरती होती है जो कि भारत में ही नहीं बल्कि संपूर्ण दुनिया में प्रसिद्ध है लोग दूर-दूर से भगवान भोले के दर्शन के लिए और इस आरती के लिए बम बम भोले के नारे लगाते हुए चली आती है यहां की होने वाली जयपुर से आरतियां इस प्रकार है सुबह 3:00 बजे मंगल चरण आरती होती है उसके बाद सुबह 11:00 बजे भोग आरती होती है उसके बाद शाम 7:00 बजे सप्तर्षी आरती होती है उसके बाद रात्रि 9:00 बजे भोज आरती होती है और अंतिम शाइन आरती रात 11:00 बजे होती है मंदिर सुबह 4:00 बजे से सुबह 11:00 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है उसके बाद दोपहर 12:00 बजे से शाम 7:00 बजे तक उसके बाद रात 9:00 बजे तक आरती चलती है 9:00 बजे से फिर 10:00 बजे तक भक्तों के लिए मंदिर खुला रहता है और अंतिम आरती रात 11:00 बजे होती है और आरती के बाद मंदिर बंद कर दिया जाता है यहां पर भगवान शिव को राजा के रूप में  और काल भैरव को  यहां के कोतवाल के रूप में पूजा जाता है कहा जाता है कि  काल भैरव के दर्शन किए बगैर और उनकी आज्ञा लिए बगैर भगवान शिव के दर्शन नहीं किए जाते है क्योंकि भगवान शिव ने स्वयं ही काल भैरव को यहां का कोतवाल नियुक्त किया था

 यहां की गंगा आरती भी बहुत प्रसिद्ध है
काशी में कुल 84 घाट बनाए गए हैं जिसमें से दशाश्वमेध घाट  सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है श्रद्धालुओं की भीड़ सबसे ज्यादा श्रावण के महीने में इसी घाट पर रहती है भक्तजन दशाश्वमेध घाट से ही गंगा स्नान करके शुद्ध होकर और निर्मल मन से भगवान शिव के वमरूपी काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए जाते हैं

कैसे जाए काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन को


काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक होने के कारण हर साल यहां पर लाखों की संख्या में भगवान भोले के भक्त चले आते हैं काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग जाने के लिए भारत के सभी राज्यों से डायरेक्ट ट्रेन चलती है काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग जाने के लिए आप लोगों को वाराणसी की ट्रेन लेनी होगी अगर आपके शहर से वाराणसी के लिए डायरेक्ट ट्रेन नहीं चलती है तो आपको वह चेक कर लेना होगा कि आपकी किसी आसपास के शहर से वाराणसी के लिए डायरेक्ट ट्रेन चलती है अगर आप लोग भारत देश के बाहर से आ रहे हैं तो आपको दिल्ली के लिए डायरेक्ट फ्लाइट लेनी होगी दिल्ली से वाराणसी जाने के लिए कई ट्रेनें चलती है और वह आपको आसानी से मिल जाएगी और दिल्ली से प्राइवेट बस सेवा टैक्सी सेवा भी आपको आसानी से मिल जाएगी वाराणसी के अलावा  नजदीकी रेलवे स्टेशन  मुगलसराय जोकि वाराणसी से 18 किलोमीटर की दूरी पर है  दूसरा इलाहाबाद रेलवे स्टेशन जो कि वाराणसी से 128 किलोमीटर की दूरी पर है आप किसी भी रेलवे स्टेशन का चयन कर सकते हैं जहां से आपके शहर से ट्रेन चलती हो  वाराणसी रेलवे स्टेशन आने के बाद आपको दशाश्वमेध घाट के लिए  ऑटो बुक कर लेना है  वाराणसी रेलवे स्टेशन से दशाश्वमेध घाट की दूरी  4:5किलोमीटर है और उसके बाद आपको दशाश्वमेध जाना है और उस के नजदीक ही होटल धर्मशाला आदि बुक कर लेना है क्योंकि यहां से विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग का मंदिर बहुत ही नजदीक है अगर आपका बजट ठीक नहीं है तो आप काशी विश्वनाथ संस्थान की अन्नपूर्णा भवन में रुक सकते हैं जहां पर आपको फ्री में रहने की व्यवस्था हो जाएगी और आपको फ्री में खाना भी दिया जाएगा वैसे तो काशी में सस्ते बजट में आपको धर्मशाला आसानी से मिल जाएगी क्योंकि काशी में कई धर्मशाला ऐसी भी है जहां पर आप को 200 से ₹300 के आसपास आसानी से रूम मिल जाएगी

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रूम पर जाने के बाद आपको सबसे पहले दशा सुमेर घाट पर आ जाना है और गंगा में स्नान कर कर नजदीकी ही स्थित है काल भैरव के दर्शन कर लेना है और उसके बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए जाना है मंदिर में दर्शन के लिए जाने से पहले आपको आपके मोबाइल बगैर अपने होटल में रूम पर ही रख देना है क्योंकि मंदिर संस्थान की तरफ से मोबाइल लॉकर की व्यवस्था नहीं है

अगर आप बुजुर्ग है तो और आप लाइन में ज्यादा देर खड़े नहीं रह सकते हैं तो आप लोग ₹300 में VIP दर्शन पास ले सकते हैं जो कि मंदिर संस्थान के काउंटर से ही लेना है आपको ना की किसी एजेंट से
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