रामेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर का महत्व और इतिहास

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग का महत्व और इतिहास


रामेश्वरम कैसे जाए
रामेश्वरम कैसे जाए
रामेश्वरम कैसे जाए 


रामेश्वरम हमारे भारत देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में से 11 वे क्रमांक का ज्योतिर्लिंग माना जाता है और यह ज्योतिर्लिंग भारत के चार धाम में एक धाम भी माना जाता है इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना माना जाता है इसके बारे में हम आगे इसकी कथा में विस्तार से जानेंगे

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर हमारे भारत देश के दक्षिण भारत में तमिलनाडु राज्य मैं एक शंकाकार दी पर रामेश्वर नामक स्थान पर स्थित है इसे रामानामा स्वामी के नाम से भी जाना जाता है यह मंदिर दक्षिण भारत का तीसरा सबसे बड़ा और विश्व का सबसे ऊंचा मंदिर माना जाता है

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की स्थिति और इतिहास


रामेश्वरम कैसे जाए
रामेश्वरम कैसे जाए



यह मंदिर 151 एकड़ जमीन पर स्थित है इस मंदिर के पूर्व द्वार पर 10 और पश्चिमी द्वार पर 7 मंजिला गोपुरम है इस मंदिर का गलियारा विश्व का सबसे बड़ा गलियारा है जो कि 4000 फुट लंबा है इसके प्रत्येक गलियारे 700 फीट लंबे हैं 12वीं शताब्दी में श्रीलंका के राजा पराक्रम बाहु ने इस मंदिर के गर्भ गुरुओं का निर्माण किया था और इनके पश्चात समय समय पर उनके वंशजों ने इस मंदिर के निर्माण का कार्य जारी रखा इस मंदिर के संपूर्ण निर्माण को करीब 350 वर्षों में पूरा किया गया ऐसा माना जाता है


इस मंदिर के पूर्व द्वार पर विशाल समुद्र नजर आता है जिसे अग्निकुंड तीर्थ कहते हैं जिसमें भक्तजन स्नान कर कर गीले कपड़ों के साथ ही मंदिर की ओर प्रस्थान करते हैं मंदिर में 22 कुंड बनाए गए हैं कहा जाता है कि इन 22 गुंडों के पानी से स्नान करने से सभी लोगों से मुक्ति मिलती है 22वें कुंड के पानी के स्नान के पश्चात भक्तजनों अपने गीले वस्त्र छोड़कर नए वस्त्र पहन कर मंदिर के गर्भ ग्रह की ओर भगवान शिव के चमत्कारी ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए जाते हैं
चलिए हम जानते हैं कि आखिर रामेश्वर ज्योतिर्लिंग अस्तित्व में कैसे आया

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रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा

पहली कथा

रामेश्वरम कैसे जाए
रामेश्वरम कैसे जाए


रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की अस्तित्व की और स्थापना की दो कथा सुनने में आती है जो की पहली कथा इस प्रकार है आप लोगों को पता ही होगा कि रावण माता सीता का अपहरण कर कर उन्हें अपने साथ लंका ले गया था माता सीता को रावण की कैद से छुड़ाने के लिए श्री राम ने लंका पर आक्रमण की शुरुआत की लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्री राम के समक्ष एक सबसे बड़ी समस्या थी जो था समुद्र पर सेतु बांधना उन्होंने उनके सेना में स्थित नल और नील नामक दो वानर और उनके साथ संपूर्ण सेना को समुद्र पर सेतु बनाने को कहा सेतु बनने तक उन्होंने विजय श्री का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए भगवान शिव के रेत के शिवलिंग को स्वयं अपने हाथों से बनाया और उसकी पूजा की तभी भगवान शिव ने स्वयं वहां पर प्रकट होकर उन्हें विजय श्री का आशीर्वाद दिया और वहां पर हमेशा के लिए ज्योतिर्लिंग स्वरूप में स्थापित हो गए यह शिवलिंग भगवान श्री राम द्वारा बनाया गया था इसीलिए इसे रामेश्वर ज्योतिर्लिंग कहते हैं और उसके साथ-साथ इस ज्योतिर्लिंग को विजय श्री का आशीर्वाद मिलने वाला ज्योतिर्लिंग भी कहा जाता है



 दूसरी कथा  

रामेश्वर ज्योतिर्लिंग की दूसरी कथा इस प्रकार है कि कहा जाता है कि भगवान श्री राम द्वारा रावण का वध कर कर लंका पर विजय प्राप्त करने के पश्चात ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान श्रीराम ने समुद्र के किनारे भगवान शिव की पूजा करने का निर्णय लिया और उन्होंने हनुमान जी को कैलाश पर्वत से एक शिवलिंग लाने को कहा मगर हनुमान जी द्वारा शिवलिंग को लेकर आने में हुई देरी के कारण माता सीता ने स्वयं ही समुद्र के किनारे रेत से एक शिवलिंग का निर्माण किया और प्रभु श्री राम और माता सीता ने उस शिवलिंग का अभिषेक कर कर पूजा अर्चना की उसके पश्चात हनुमान जी जिन्हें प्रभु श्रीराम ने कैलाश पर्वत भेजा था शिवलिंग लाने के लिए वह शिवलिंग लेकर वहां पर पधारे फिर भगवान श्रीराम ने उस सीलिंग की भी स्थापना उसी जगह कर दी और हनुमान जी से कहा की यह दोनों शिवलिंग रामेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से जाने जाएंगे और सबसे पहले तुम्हारे द्वारा लाए गए ज्योतिर्लिंग की ही पूजा होगी 


चलिए जानते हैं आखिर कैसे जाया जाए भगवान शिव के रामेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए


रामेश्वरम कैसे जाए संपूर्ण जानकारी



रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग मंदिर रामनाथ स्वामी के नाम से भी जाना जाता है हमारे भारत देश के दक्षिण में तमिलनाडु राज्य में शंकु आकार के एक दीप पर स्थित है रामेश्वरम देश के सभी राज्यों के राजमार्ग से जुड़ा हुआ है आप लोग चाहे तो बस कार या फिर प्राइवेट टैक्सी द्वारा भी यहां तक आसानी से पहुंच सकते हैं

लगभग देश के सभी राज्यों से रामेश्वरम के लिए डायरेक्ट ट्रेनें चलती है आप लोग चाहे तो ट्रेन से भी यहां पहुंच सकते हैं यहां का रेलवे स्टेशन रामेश्वरम जंक्शन के नाम से जाना जाता है रामेश्वरम दीप पर जाते वक्त रास्ते में एक विशाल समुद्र पर बना हुआ पुल लगता है जिसे अमन बेड भी कहते हैं जिसे देखने लोग दूर-दूर से आते हैं उसी के बगल में एक सड़क मार्ग का पुल भी है उस पुल पर खड़े होकर लोग ट्रेन को स्कूल से जाते हुए देखने के लिए रोजाना आते हैं जो कि एक आश्चर्यजनक नजारा होता है और यह आप लोगों के लिए एक लाइफ टाइम एक्सपीरियंस होगा रामेश्वरम पहुंचते ही रामेश्वरम रेलवे स्टेशन से रामेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दूरी 4 किलोमीटर है आपको वहां पहुंचते ही अपने लिए सर्वप्रथम किसी होटल या लॉज या धर्मशाला का इंतजाम कर लेना है जो कि आपको उचित दामों में मिल जाएगी साधारण होटल में टू बैडरूम का किराया यहां पर साडे ₹300 से ₹500 के आसपास हो सकता है धर्मशाला में ₹100 से लेकर के ₹200 तक आसानी से रूम मिल जाएगी और धर्मशाला में ₹200 से ₹500 तक आसानी से मिल जाती है आप लोग आपकी बजट अनुसार यहां पर रूम बुक कर सकते हैं या फिर ऑनलाइन भी पहले से कर सकते हैं 


रामेश्वरम की यात्रा पर जाने से पहले आप लोगों को एक बात का ध्यान रखना है अगर आप रामेश्वरम का टूर प्लान कर रहे हैं तो आपको कम से कम 2 दिन रामेश्वरम में रुकना है इसी हिसाब से आपको टूर प्लान करना है
रामेश्वरम गर्मी के मौसम में ना जाए क्योंकि यह जगह समुद्र किनारे होने के कारण यहां पर अधिक गर्मी होती है इसलिए यहां पहुंचने के लिए सबसे बढ़िया मौसम ठंडी का माना जाता है
अगर आप लोग हमसे टूर प्लान लेना चाहते हो तो आप लोग कमेंट के द्वारा या फिर हमें मिलकर कर हमसे संपर्क कर सकते हो हमारा मेल आईडी यह रहा
Jay malhar tours and Management


विदेशी नागरिक रामेश्वरम कैसे पहुंचे

रामेश्वरम कैसे जाए
रामेश्वरम कैसे जाए


अगर आप लोग भारत देश के बाहर से आ रहे हैं तो आपके लिए रामेश्वरम पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट चेन्नई एयरपोर्ट हो सकता है चेन्नई एयरपोर्ट से रामेश्वरम की दूरी 580 किलोमीटर है उसके बाद दूसरा नजदीकी एयरपोर्ट मदुरई एयरपोर्ट हो सकता है मदुरई एयरपोर्ट से रामेश्वरम की दूरी 180 किलोमीटर है इस दूरी को आप टैक्सी बस या फिर प्राइवेट कार से पूरी कर सकते हैं रामेश्वरम में आने के बाद यहां से मंदिर की दूरी 4 किलोमीटर है रामेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए जाने से पहले आपको एक बात का ध्यान रखना है इस मंदिर में मोबाइल कैमरा दी अलाउड नहीं है इन सभी चीजों को आपको अपने होटल रूम में ही रखकर जाना है दर्शन को जाने से पहले मंदिर के पूर्व द्वार पर समुद्र है जिसे अग्निकुंड कहा जाता है सर्वप्रथम आपको वहां पर स्नान करना है और उसके बाद ही आपको दर्शन के लिए जाना है
आशा करते हैं कि हमारे द्वारा दी गई जानकारी से आप संतुष्ट होंगे फिर भी कुछ रह जाता है तो आप हमें कमेंट कर सकते हैं

जय हिंद जय भारत







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