कैसे प्रकट हुए भगवान शिव त्रंबकेश्वर में कैसे जाए त्रंबकेश्वर

 कैसे प्रकट हुए भगवान शिव त्रंबकेश्वर में और मां गंगा गोदावरी के रूप में और कैसे जाए त्रंबकेश्वर संपूर्ण जानकारी


नंदकिशोर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र
त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र



त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग 12 ज्योतिर्लिंगों में से पृथ्वी का 8 वे नंबर का ज्योतिर्लिंग माना जाता है यह ज्योतिर्लिं
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक मात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है कि जहां पर भगवान शिव के साथ ब्रह्मा विष्णु भी लिंग रूप में स्थापित है और उनके साथ साथ मां गंगा भी गोदावरी के रूप में यहां पर स्थित है भगवान शिव के तीन नेत्र होने के कारण उन्हें त्र्यंबक भी कहा जाता है और यहां पर भगवान ब्रह्मा विष्णु और स्वयं शिव विराजमान होने के कारण इसे त्रंबकेश्वर कहा जाता है

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त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग हमारे भारत देश के महाराष्ट्र राज्य में नासिक शहर के त्रिंबक गांव में ब्रम्हगिरी पर्वत के समीप है यह ज्योतिर्लिंग नाशिक शहर से 60 किलोमीटर की दूरी पर है

कैसे प्रकट हुए भगवान शिव त्रंबकेश्वर में और साथी मां गंगा गोदावरी के रूप में संपूर्ण कथा


गोदावरी नदी उगम स्थान
गोदावरी नदी भूमि स्थल



यह कथा भगवान शिव त्रंबकेश्वर महादेव की ही नहीं बल्कि मां गंगा के पृथ्वी पर गोदावरी के रूप में प्रकट होने की भी है कहा जाता है कि यहां पर कई वर्षों तक वर्षा नहीं हुई थी उसके कारण यहां के लोग यहां से भागने लगे परंतु गौतम ऋषि ने 6 महीने तक वरुण देव की तपस्या की और वरुण देव ने उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें  कहा कि आप यहां पर एक खड्डा खोदे उस खड्डे को वरुण देव ने दिव्य जल से भर दिया उसके बाद वहां पर हरियाली पुनः लौट आई और लोग भी आने लगे जिसे दिव्य जल कुंड कहा गया
एक बार महर्षि गौतम के कुछ शिष्य उस कुंड पर पानी भरने गए और वही पर उसी वक्त कुछ ऋषि मुनि की पत्नियां भी आ गई उन बालकों में और ऋषि मुनियों की पत्नियों में कुछ विवाद हुआ कि हम पहले पानी भरेंगे इसके चलते वहां पर मां अहिल्या आई जोकि महर्षि गौतम की पत्नी थी उन्होंने उन ऋषि पत्नियों को समझाया कि यह बालक पहले से ही यहां पर आए थे इसीलिए पहले जल भरने का अधिकार इनका है अहिल्या माता की  यह बातें सुनकर वह  नाराज हो गई इसके बाद उनकी पत्नियों ने वापस जाकर अपने पतियों से यह सारी बातें बढ़ा चढ़ाकर बताई जो ऋषि मुनि गौतम ऋषि से पहले से ही ईर्ष्या करते थे उन्होंने इस बात का बदला लेने की ठान ली और उन्होंने भगवान गणेश की पूजा अर्चना करना शुरू कर दिया

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भगवान गणेश के वहां पर प्रकट होने के बाद उन्होंने उनकी मंशा बताइए और उनसे आग्रह किया कि वह उनकी सहायता करें मगर भगवान गणेश ने उन्हें समझाया कि ऐसे ऋषि मुनि के साथ गलत व्यवहार करना उचित नहीं मगर वह नहीं माने उनके आग्रह करने पर भगवान गणेश को उनका साथ देना पड़ा

1 दिन महर्षि गौतम अपने धान के खेत में धान काट रहे थे उस वक्त भगवान गणेश एक गाय के रूप में वहां प्रकट हुए गौतम ऋषि ने उस गाय को प्यार से बुलाया और धान खिलाने लगे धान खाते ही वह गाय नीचे जमीन पर गिर गई और मर गई उसी वक्त वहां पर छुपे हुए सभी ऋषि मुनि और उनकी पत्नियां वहां पर आई और उन्होंने गौतम ऋषि को अपशब्द कहते हुए कहा कि तुम गौ हत्यारे हो तुम यहां से चले जाओ तुम्हारे यहां रहने से हमारे यज्ञ सफल नहीं होंगे तो गौतम ऋषि ने उनसे इस गौ हत्या से मुक्त होने की विधि पूछी तो उन्होंने कहा कि आपको पृथ्वी के तीन परिक्रमा पूरी करनी होगी उसके बाद 100 बार ब्रम्हगिरी की परिक्रमा करनी होगी वापस आकर एक महीना उपवास करना होगा और यहां पर गंगा लगाकर उसमें स्नान कर कर 100000 शिवलिंग बनाकर उन पर 100 ग्घडे पानी से अभिषेक करना होगा तब जाकर आपको इस गौ हत्या से मुक्ति मिलेगी महर्षि गौतम ने ठीक वैसा ही किया और एक लाख शिवलिंग बनाकर उनका अभिषेक करने लगे अभिषेक करते ही वहां पर भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए और उन्होंने महर्षि गौतम से कहा कि मांगो क्या वरदान मांगते हो तो महर्षि गौतम ने कहा कि मुझे इस गौ हत्या के पाप से मुक्त कर दीजिए प्रभु भगवान शिव ने कहा कि तुमने कोई पाप नहीं किया है यह तो उन  ऋषि का छल था भगवान शिव ने कहा मैं उन लोगों को दंड जरूर दूंगा मगर महर्षि गौतम ने कहा नहीं प्रभु अगर वह लोग ऐसा नहीं करते तो मुझे आपके दर्शन भी ना होते उन्होंने जो किया ठीक ही किया है आप उन्हें माफ कर दीजिए फिर गौतम ऋषि ने भगवान शिव से वहां पर गंगा को प्रकट करने की इच्छा जताई मगर मां गंगा ने भगवान शिव से कहा कि अगर आप स्वयं यहां पर ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थापित हो जाए तो मैं यहां पर अवश्य गोदावरी के रूप में प्रकट होउंगी भगवान शिव ने उनकी बात मान ली और स्वयं त्रंबकेश्वर में त्रंबकेश्वर महादेव के नाम से ज्योतिर्लिंग स्वरूप में प्रकट हुए और उनके साथ साथ मां गंगा भी वहां पर गोदावरी के नाम से प्रकट हुई

आखिर क्यों कहा जाता है गोदावरी को दक्षिण की गंगा


कहा जाता है कि त्रंबकेश्वर में मंदिर के अंदर प्रमुख ज्योतिर्लिंग के साथ-साथ एक खड्डे में तीन छोटे-छोटे ज्योतिर्लिंग है जो कि भगवान ब्रह्मा भगवान विष्णु और भगवान शिव के रूप है गोदावरी नदी का उद्गम ब्रम्हगिरी पहाड़ी से होता है ब्रह्मागिरी पहाड़ी पर चढ़ने के लिए बहुत अधिक चौड़ी करीब 700 सीढ़ियां बनाई गई है ब्रह्मागिरी पर्वत के मध्य में लक्ष्मण कुंड और राम कुंड स्थित है और सबसे अंतिम छोर पर गोदावरी उद्गम स्थल गोमुख जहां से निरंतर मां गंगा गोदावरी के नाम से बहती है और बहती  बहती दक्षिण की ओर जाति हैं इसीलिए इसे दक्षिण की गंगा भी कहते हैं


कैसे जाए त्रंबकेश्वर संपूर्ण जानकारी


त्रंबकेश्वर भारत में महाराष्ट्र राज्य के नासिक से 60 किलोमीटर की दूरी पर त्रंबकेश्वर नामक स्थान पर स्थित है यह जाने के लिए आप लोगों को सर्वप्रथम नासिक रेलवे स्टेशन आना होगा जोकि नासिक रोड के नाम से प्रसिद्ध है यहां आने के लिए देश के सभी राज्य से डायरेक्ट ट्रेनें चलती है और यह नाशिक शहर भारत के सभी राज्यों के सड़क मार्ग से लगा हुआ है जहां पर आप लोग प्राइवेट गाड़ी से आसानी से आ जा सकते हैं अगर आपकी शहर से नासिक के लिए ट्रेन नहीं मिलती है तो आप मुंबई भी आ सकते हैं मुंबई से नासिक की दूरी 172 किलोमीटर है

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अगर आप लोग भारत के बाहर से आ रहे हैं तो आप लोगों को मुंबई अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट के लिए आसानी से फ्लाइट मिल जाएगी वहां से आप टैक्सी कार बस आदि सेवा से नासिक शहर तक आसानी से आ सकते हैं नासिक शहर के सरकारी बस स्टैंड से निरंतर आधे घंटे बाद त्रंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग के लिए बस सेवा उपलब्ध रहती है अगर आप लोग त्रिंबकेश्वर सुबह जल्दी पहुंच जाते हैं तो आप लोग भगवान त्रंबकेश्वर महादेव के दर्शन कर कर और ब्रम्हगिरी पर्वत पर मां गंगा गोदावरी के दर्शन कर कर एक दिन में ही वापस वहां से निकल सकते हैं या फिर आप 1 दिन रुक भी सकते हैं आपको यहां पर रुकने के लिए ₹300 से लेकर ₹500 तक धर्मशाला या फिर लाज आसानी से मिल जाते हैं और सो रुपए में भरपेट खाना भी मिल जाता है

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