कैसे जाए परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर संपूर्ण जानकारी

परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग

वैजनाथ ज्योतिर्लिंग
परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग



वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कई वर्षों से विवादों से घिरा हुआ है वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के सही स्थान को लेकर लोगों में कई मतभेद है कुछ लोग कहते हैं कि वैजनाथ ज्योतिर्लिंग झारखंड प्रांत के संथाल परगना के दुमका नमक जनपद में स्थित है और कुछ लोगों का मानना है कि वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के बीड़ जिले में परली नामक स्थान पर स्थित है

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झारखंड का ज्योतिर्लिंग देवघर के नाम से प्रसिद्ध है विवाद तो तब हुआ जब मध्य प्रदेश के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में 5 जनवरी से 7 जनवरी के दौरान 12 ज्योतिर्लिंगों का एक भव्य आयोजन हुआ जिसमें 12 ज्योतिर्लिंगों के मंदिर से धर्म गुरु और पुजारियों को बुलाया गया महाराष्ट्र के ज्योतिर्लिंग के पत्रिका पर परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग लिखा था फिर उसके बाद देवघर के पुजारियों ने उस पर आक्रोश जताया और उन्होंने कहा अगर हमारे राज्य के ज्योतिर्लिंग का नाम आपके इस सूची में नहीं है तो हमें आमंत्रित ही क्यों किया है और उन्होंने कड़क शब्दों में चेतावनी भी दी अगर आप देवघर के ज्योतिर्लिंग को मान्यता नहीं देंगे तो हम ओरिजिनल दस्तावेजों के साथ कोर्ट जाएंगे और वहां पर मुकदमा करेंगे

चलिए जानते हैं वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के बारे में


वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग स्थित है कहा जाता है कि जहां-जहां भगवान शिव स्वयं प्रकट हुए उस स्थान को ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है

 वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग यह हमारे भारत का 12 ज्योतिर्लिंगों में से नौवें क्रमांक का ज्योतिर्लिंग माना जाता है कुछ लोगों के अनुसार कहा जाता है कि वैद्यनाथ धाम यह स्थान झारखंड राज्य के पूर्व में बिहार प्रांत के संथाल परगना के दुमका नामक जनपद में पड़ता है

पुराणों के अनुसार परली वैद्यनाथ का उल्लेख मिलता है उसी के आधार पर लोगों का मानना है कि महाराष्ट्र राज्य के बीड़ जिले के अंतर्गत परली ग्राम में स्थित परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग ही 12 ज्योतिर्लिंगों में से 9 वे क्रमांक का ज्योतिर्लिंग असली ज्योतिर्लिंग है

जिसका जीवनोदार स्वयं इंदौर की महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था यह ज्योतिर्लिंग एक पहाड़ी पर स्थित है जिस पर चढ़ने के लिए सीढिया भी बनवाई गई  है इस पहाड़ी के नीचे एक छोटी सी नदी भी बहती है और उसके निकट ही एक शिव कुंड का निर्माण भी किया गया है लोगों का मानना है कि परली वैद्यनाथ ही वास्तविक ज्योतिर्लिंग है

परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा


परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग
परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की कथा काल्पनिक और पुराणों पर आधारित है
कहा जाता है कि लंकापति रावण जिसका नाम दशानन भी था उसके 10 सर होने के कारण उसका नाम दशानन पड़ा और वह भगवान शिव का परम भक्त था उसने कई वर्षों तक भगवान शिव की तपस्या की मगर भगवान शिव के प्रकट न होने के कारण वह क्रोधित होकर अपने एक एक सिरको काटकर अग्नि कुंड में डालता गया ऐसे करते उसने स्वयं के 9 सिर काट दिए जब वह दसवां शेर काटने लगा तब भगवान शिव ने स्वयं ही उसे साक्षात दर्शन दिए और उस से वर मांगने को कहा उसने भगवान शिव से कहा कि आप शिवलिंग में प्रकट होकर मेरे साथ लंका में वास करने के लिए चले भगवान शिव ने उसकी यह बात मान ली और साथ ही एक शर्त रखी अगर इस शिवलिंग को को तुम कहीं जमीन पर रखोगे तो मैं वहीं पर हमेशा के लिए स्थापित हो जाऊंगा फिर कभी भी वहां से नहीं हीलूंगा रावण ने उनकी शर्त मान ली और वह उस शिवलिंग को को लेकर लंका की ओर निकल पड़ा मगर उसी वक्त रावण को लघुशंका का आभास हुआ और वह अपने मूत्र विसर्जन को रोक नहीं सका वहां पर उसने एक ग्वालियर को देखा रावण ने उस ग्वाले के हाथ में जबरदस्ती उस शिवलिंग को थमा दिया और वह मूत्र विसर्जन के लिए चला गया मगर उस ग्वाले से उस शिवलिंग का भार सहन नहीं हुआ और वह उस शिवलिंग को वहीं पर जमीन पर छोड़कर वहां से चला गया कहा जाता है कि वह ग्वाला कोई और नहीं बल के उसके रूप में स्वयं भगवान विष्णु थे

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उस शिवलिंग को उठाने का कई बार पका प्रयास कर कर थकने के बाद आखिर दशानन रावण वहां से वापस लंका चला गया और उसके बाद उस जगह पर भगवान शिव के साक्षात रूप के दर्शन करने के लिए नारद मुनि और कुछ ऋषि मुनि आ पहुंचे उन्होंने उस शिवलिंग की विधि पूर्वक पूजा की और उस शिवलिंग का वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग के नाम से नामकरण किया इसीलिए इसे वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग कहते हैं


परली वैद्यनाथ कैसे जाएं

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य बस सेवा
वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य सरकार बस सेवा

परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से नवे क्रमांक का ज्योतिर्लिंग माना जाता है जोकि महाराष्ट्र राज्य के बीड़ जिले में परली नामक ग्राम में स्थित है वह जाने के लिए देश के सभी राज्य मार्ग से परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग जुड़ा हुआ है आप नांदेड़ होते हुए परली वैजनाथ बाय रोड आसानी से पहुंच सकते हैं जिसकी नांदेड़ से दूरी मात्र 103 किलोमीटर है

वहीं अगर ट्रेन मार्ग की बात करें तो परली वैजनाथ जाने के लिए डायरेक्ट ट्रेनें चलती है जोकि परली रेलवे स्टेशन तक जाती है मगर बहुत ही कम रेलवे स्टेशनों से परली वैजनाथ के लिए ट्रेनें छुट्टी है अगर आपके शहर से परली वैद्यनाथ के लिए ट्रेन नहीं मिलती है तो आपके लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन नांदेड़ होगा जहां से आप आसानी से परली वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग जा सकते हैं नांदेड़ से इसकी दूरी 2 घंटे 50 मिनट की है जोकि 103 किलोमीटर है वह पेन वहां पर पहुंचने में कितना समय लेगी वह ट्रेन की स्पीड पर निर्भर है

अगर कोई इंडिया के बाहर से इंडिया में परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए आना चाहता है उसके लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पुणे मुंबई या फिर नांदेड़ हो सकता है पुणे से इसकी दूरी 7 घंटे की है जो कि 350 किलोमीटर है मुंबई से इसकी दूरी 480 किलोमीटर जो कि कुल 10 घंटे की है नांदेड़ एयरपोर्ट से इसकी दूरी 111 किलोमीटर है जोकि 2 घंटे 46 मिनट में पूरी की जा सकती है

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परली रेलवे स्टेशन से परली वैजनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर की दूरी कुल 4 किलोमीटर है परली में आपको आसानी से आपके बजट अनुसार कई छोटे बड़े होटल या फिर धर्मशालाएं आसानी से मिल जाएगी जहां आप रुकना चाहिए तो रात गुजार सके और भरपेट खाना खाने के लिए कई छोटे-बड़े होटल भी आसानी से मिल जाएंगे चाहे तो आप लोग होटल की बुकिंग ऑनलाइन भी कर सकते हैं या फिर वहां पर जाकर भी आपको आसानी से होटल में रूम मिल जाएगी मगर महाशिवरात्रि के वक्त और श्रावण महीने में यहां पर अच्छी खासी भीड़ रहती है अगर आप उस समय यहां पहुंचते हैं तो आपके लिए ऑनलाइन रूम बुकिंग करना ही सबसे सही उपाय होगा

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की आरती का समय



सुबह 4:30 बजे काकड़ा आरती उसके बाद 5:00 बजे से लेकर के 2:00 बजे तक भक्तों को दर्शन की अनुमति 12:30 बजे नवेद पूजा 2:00 बजे से 3:00 बजे तक बेलपत्र जल अर्पण पूजा 3:00 से 5:00 तक मुख्य दर्शन भस्म चंदन लेपन  आदि सिंगर 
5:00 बजे से 9:00 बजे तक बेलपत्र अर्पण और भक्तों के लिए दर्शन की अनुमति रात 9:30 बजे शयन आरती और रात 10:00 बजे मंदिर बंद
प्रति सोमवार रात 9:30 बजे से 12:00 बजे तक संत कीर्तन 12:00 बजे से 1:00 बजे तक आरती
सावन महीने में सोमवार के दिन रात 12:00 बजे से सुबह 7:00 बजे तक अभिषेक और पूजा आरती होती है अगर आप लोगों को हमारी दी गई जानकारी पसंद आए तो हमारे वेबसाइट को ब्लू कलर के बटन को दबाकर फॉलो जरूर करें अगर आप के कुछ प्रश्न रह जाते हैं तो आप हमें कमेंट भी कर सकते हैं

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