घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन को कैसे जाए

घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग की संपूर्ण जानकारी


घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाए
घुश्मेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं



यह ज्योतिर्लिंग हमारे भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से सबसे आखरी और 12 वे क्रमांक का ज्योतिर्लिंग माना जाता है

भगवान शिव इस जगह पर घुष्नेश्वर  नाम से ज्योतिर्लिंग के रूप में कैसे प्रकट हुए और क्या है उसकी कहानी इसके बारे में हम आगे विस्तार से उसकी कथा में जानेंगे उससे पहले हम घुष्नेश्वर के बारे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जान लेते हैं

घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग को घुश्मेश्वर के नाम से भी जाना जाता है यह मंदिर हमारे भारत देश के महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद जिले के दौलताबाद से 11 किलोमीटर की दूरी पर एलोरा की गुफाओं के नजदीक स्थित है यह वहीं एलोरा की गुफाहै जहां पर प्राचीन काल में बौद्ध और जैन धर्म के  लोगोंं ने अपने रहने के लिए इनका निर्माण किया था इन गुफाओं का उल्लेख हड़प्पा सभ्यता भी मिलता है अगर आप लोग ऐतिहासिक स्थानों के बारे में दिलचस्पी रखते हैं तो आपके लिए यह स्थान एक आकर्षण का केंद्र हो सकता है

जानते हैं घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के बारे में

इस मंदिर की स्थापना 18 वीं सदी में महारानी राजमाता अहिल्याबाई होल्कर ने की थी यह मंदिर शहर से दूर जंगलों के मध्य बसा हुआ है इस मंदिर के दर्शन मात्र से सभी पापों से मुक्ति मिलने के साथ-साथ संतान प्राप्ति का भी लाभ प्राप्त होता है कैसे मिलता है यहां पर संतान प्राप्ति का लाभ इसके बारे में हम आगे इसकी कथा में विस्तार से जानेंगे इस मंदिर के दर्शन करने से पूर्व पुरुषों को स्नान कर कर अपने बदन से शर्ट बनियान कमर में चमड़े का बेल्ट आदि निकालकर नंगे बदन ही मंदिर के गर्भ गृह में प्रवेश करना होता है

घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग के प्रकट होने की संपूर्ण कथा


घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाए
घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाए


वैसे तो भगवान शिव के इस ज्योतिर्लिंग के बारे में कई कथाएं प्रचलित है उनमें से एक कथा जोकि शिव पुराण के कोटि रूद्र संहिता के अनुसार सही मानी जाती है

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कहा जाता है कि दक्षिण भारत के एक वन में सुधर्मा नामक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेहा के साथ रहता था
दोनों ही भगवान शिव के परम भक्त थे सुधर्मा की पत्नी सुदेहा भगवान शिव की रोजाना नित्य नियम से पूजा भी करती थी परंतु वह कई वर्षों से संतान ना होने के कारण दुखी रहती थी क्योंकि आस पड़ोस वाले उसे हरदम नि संतान होने के कारण तने मारा करते थे उससे यह ताने बर्दाश्त नहीं होते थे एक दिन उसने अपने पति से विनती की कि वह मेरी बहन घुश्मा से विवाह कर ले हम दोनों बहने खुशी खुशी रहेंगी और उसने अपने पति को वचन दिया कि मेरे मन में कभी भी ईर्ष्या की भावना नहीं लगेगी परंतु ऐसा ना हो सका

इसके पश्चात ब्राह्मण सुधर्मा ने अपनी पत्नी की बात मानते हुए उसकी बहन घुश्मा से विवाह कर लिया घुश्मा अपनी बड़ी बहन  सुदेहा की आज्ञा अनुसार  रोजाना भगवान शिव की  100 शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा किया करती थी और उन शिवलिंग ओं को पास के तालाब में विसर्जन कर देती थी  कुछ वर्षों पश्चात उन्हें एक पुत्र हुआ दोनों बहाने पुत्र के साथ खुशी-खुशी रहने लगी कुछ वर्षों बाद पुत्र का विवाह भी हो गया उसके बाद एक दिन सुदेहा के मन में ईर्ष्या निर्माण हुई और उसने एक दिन मौका देख कर सोए हुए पुत्र को मार दिया और उसके टुकड़े पास के उसी तालाब में बहा दिए जहां पर घुश्मा पूजा कर कर शिवलिंग का विसर्जन किया करती थी

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उत्तर की मृत्यु की खबर मिलने के बाद भी घुश्मा नित्य नियम से रोजाना की तरह तालाब किनारे भगवान शिव की पूजा करने और शिव लिंगों को तालाब में विसर्जित करने के लिए चली गई जैसे ही उसने शिवलिंग को विसर्जन करना शुरू किया उसी वक्त उसे भगवान शिव ने साक्षात दर्शन देकर उसे उसके पुत्र को लौटा दिया और उसे बताया कि तुम्हारे पुत्र की हत्या तुम्हारे ही बहन ने की थी और क्रोधित होकर भगवान शिव ने सुदेहा का वध करने के लिए त्रिशूल उठा लिया तभी घुश्मा ने भगवान शिव से कहा कि आप उन्हें माफ कर दीजिए उनके मुख से यह बात सुनकर भगवान शिव प्रसन्न हुई है और उनसे कोई वरदान मांगने को कहा तब घुश्मा ने भगवान शिव से कहा कि हे प्रभु अगर आप मेरी भक्ति से पसंद है तो हमेशा के लिए इस स्थान पर ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हो जाइए और भविष्य में यह ज्योतिर्लिंग मेरे नाम से जाना जाए इसीलिए इस ज्योतिर्लिंग को
घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग कहते हैं

घुश्मा कि भगवान शिव के प्रति आनंद भक्ति के फलस्वरूप उसे पुत्र की प्राप्ति हुई और मरे हुए पुत्र को भगवान शिव ने पुनः जीवित कर दिया इस कारणवश इस ज्योतिर्लिंग को संतान प्राप्ति के आशीर्वाद वाला दिव्य ज्योतिर्लिंग भी कहते हैं


कैसे जाए घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर

घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं
घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं


घुष्नेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर भारत में महाराष्ट्र राज्य के औरंगाबाद के नजदीक स्थित दौलताबाद से 11 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है यह स्थान देश के सभी राज्य मार्गों से जुड़ा हुआ है यहां पर आप प्राइवेट बस टैक्सी या स्वयं की गाड़ी से आसानी से आ जा सकते हैं

अगर आप ट्रेन से आना चाहे तो महाराष्ट्र के कई शहरों से औरंगाबाद के लिए ट्रेनें चलती है अगर आपके शहर से औरंगाबाद के लिए ट्रेन नहीं मिलती है तो आपके लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुणे रेलवे स्टेशन होगा उन्हें रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 250 किलोमीटर है और मुंबई से इसकी दूरी 422 किलोमीटर औरंगाबाद से घुष्नेश्वर की दूरी कुल 35 किलोमीटर है औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से आपको इस मंदिर तक पहुंचने के लिए कई प्रकार के साधन मिल जाएंगे

 मंदिर सुबह 5:30 बजे भक्तों के दर्शन के लिए खुलता है और रात 9:30 बजे बंद हो जाता है श्रावण के महीने में यह मंदिर सुबह 3:00 बजे से रात्रि 11:00 बजे तक भक्तों के लिए खुला रहता है मगर आप लोगों को एक बात का ध्यान अवश्य रखना है अगर आप दर्शन के लिए जा रहे हैं तो श्रावण महीने में ना जाए क्योंकि इस वक्त यहां पर अच्छी-खासी भीड़ होती है और आपको कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ सकता है

यहां पर रात ठहरने के लिए एलोरा के नजदीक कई छोटे-बड़े होटल और धर्मशालाएं उपस्थित है चाहे तो आप लोग वहां पर रूम बुक कर सकते हैं जो कि आपको ₹300 से लेकर के ₹500 तक आसानी से मिल जाएगी या फिर संस्थान द्वारा निर्मित भक्त निवास में भी आप रूम बुक कर सकते हैं जिसका किराया ₹100 से लेकर के ₹200 तक होता है इसके अलावा अगर आपका बजट अच्छा है तो आप लोग औरंगाबाद में भी रुक सकते हैं जहां पर आपको आपके बजट अनुसार हर प्रकार के छोटे बड़े होटल आसानी से मिल जाएंगे जिनका किराया ₹500 से लेकर ₹2000 तक हो सकता है

विदेशी नागरिक कैसे जाए घुष्नेश्वर

अगर आप लोग विदेशी नागरिक हो या फिर देश के बाहर से आ रहे हो तो आपके लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पुणे हो सकता है या फिर मुंबई पुणे से इस मंदिर की दूरी 250 किलोमीटर है जो कि आपके लिए सबसे नजदीकी एयरपोर्ट होगा पुणे से आपको औरंगाबाद आने के लिए या फिर औरंगाबाद से घुष्नेश्वर के लिए आसानी से हर प्रकार की बस सेवा टैक्सी सेवा आसानी से मिल जाएगी जिससे आप आसानी से आ जा सकते हैं

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