नागेश्वर ज्योतिर्लिंग जानिए संपूर्ण कथा और कैसे जाएं

क्यों रहता है विवादों में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर


नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाए
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं


नागेश्वर ज्योतिर्लिंग हमारे भारत देश में 12 ज्योतिर्लिंगों में से 10 वे क्रमांक का ज्योतिर्लिंग माना जाता है नागेश्वर नमक ज्योतिर्लिंग 3 राज्यों में होने की खबर सामने आती है जिसमें उत्तराखंड ,महाराष्ट्र, और गुजरात है इसे के कारण यह विवाद का कारण बना हुआ है 

परंतु इस नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को लेकर के लोगों में कई मतभेद है और इस पर विवाद भी होता है

 जिसमें पहले नंबर पर उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर ज्योतिर्लिंग के बारे में कहा जाता है
क्योंकि कुछ इतिहासकारों और संतों के मुताबिक स्कंद पुराण के मानस खंड और रेवा खंड में उल्लेख मिलता है जोगेश्वर मंदिर जिस स्थान पर है वहां आज भी धोली नाग कालिया नाग और बेरीनाग जैसे पौराणिक स्थान मौजूद है इन जगहों के नाम नागो पर आधारित होने के कारण और इसी आधार पर नागेश्वर ज्योतिर्लिंग यहां पर होने की संभावना जताई जाती है

दूसरा महाराष्ट्र राज्य के हिंगोली जिले में ओढा नागनाथ ज्योतिर्लिंग को कहा जाता है

और तीसरे क्रमांक पर गुजरात राज्य के द्वारका से 17 मील दूर द्वारका के बाहर स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कोही धर्म गुरु और इतिहासकारों के मुताबिक 12 ज्योतिर्लिंगों में से एकमात्र नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को ही 10 वे नंबर का असली ज्योतिर्लिंग इसे ही माना गया है और यहां पर साल भर भक्तों की लाखों की संख्या में भीड़ लगी रहती है कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति सच्ची श्रद्धा और भावना से नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है और इनकी कथा सुनता है उसको सुख ऐश्वर्य के साथ-साथ मोक्ष की भी प्राप्ति होती है


परंतु इन तीनों ज्योतिर्लिंग के बारे में और इस ज्योतिर्लिंग के प्रकट होने के बारे में जो कथा सामने आती है वह एक जैसी ही है चलिए जानते हैं हम उस कथा के बारे में

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात


कथा इस प्रकार है कि एक वन में दारूका नामांक राक्षसनि अपने पति दारुक के साथ रहती थी दारूका को माता पार्वती से वरदान था कि वह इस वन को अंतरिक्ष मार्ग से कहीं भी ली जा सकती थी मगर यह दोनों मिलकर वन में उत्पात मचा रखा था इसके कारण उस वन के निवासी एक दिन महर्षिऔर्व के पास पहुंचे और उन्हों अपने दुखद परेशानी सुनाई तभी महर्षि ने क्रोधित होकर उन राक्षसों को श्राप दे दिया कि अगर यह लोग पृथ्वी पर उदवंश मचाएंगे तो उसी वक्त नष्ट हो जाएंगे

यह बात जैसे ही देवताओं को पता चली तो उन्होंने उन राक्षसों पर आक्रमण कर दिया दारूका रक्षक देवताओं को देखकर भयभीत हो गए और उन्होंने सोचा अगर हम पृथ्वी पर इनसे युद्ध करते हैं तो ऋषि मुनि के श्राप से हम यही नष्ट हो जाएंगे और अगर युद्ध नहीं करते तो भी मारे जाएंगे उस वक्त दारूका ने माता पार्वती द्वारा दिए गए और धन का प्रयोग करते हुए इस वन को अंतरिक्षम आरके से उड़ा कर वहां से ले गई और समुद्र के मध्य उसे रख दिया और वहां पर हमेशा के लिए स्थापित हो गए

एक दिन समुद्र मार्ग से नौका द्वारा कुछ यात्री गुजर रहे थे तभी उन राक्षसों ने उन्हें बंदी बना लिया उसमें से एक भगवान शिव का परम भक्त सुप्रिया था उन राक्षसों ने उन सभी को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया सुप्रिया भगवान शिव का अनन्य भक्त था वह हरदम भगवान शिव की आराधना में लगा रहता था और उसने उसके साथ रहने वाले सभी लोगों को भी भगवान शिव की आराधना करना सिखा दिया था एक दिन वह कारागार में भगवान शिव की आराधना कर रहा था तभी यह बात दारु  राक्षस को पता चल गई और वह राक्षस सुप्रिया को मारने के लिए दौड़ा उसी वक्त भगवान शिव स्वयं वहां पर प्रकट हुए और उन्होंने सभी राक्षसों को भस्म कर दिया तभी वह  दारु राक्षस  भागते हुए अपनी पत्नी दारूका के पास गया


तभी भगवान शिव ने सुप्रिया को यह वरदान दिया कि आज से इस वन में चारों वर्ण अपने धर्म का पालन कर सकते हैं राक्षसों का इसमें कोई स्थान नहीं है
यह सुनकर दारूका बहुत भयभीत हुई और उसे उसके वंश का नाश दिखने लगा और उसने भगवान शिव के प्रकोप से बचने के लिए माता पार्वती की आराधना की और माता पार्वती से कहा कि माता आप मेरे वंश की रक्षा कीजिए तभी माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि प्रभु इस वन में इन राक्षसों के पुत्रों को रहने की अनुमति दें भगवान शिव ने माता पार्वती की यह प्रार्थना मान ली और उनसे कहा कि मैं स्वयं अपने भक्तों की रक्षा के लिए इस वन में ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान रहूंगा तभी से भगवान शिव इस जगह पर ज्योतिर्लिंग के रूप में नागेश्वर के नाम से साक्षात विराजमान है
धर्म शास्त्रों में भगवान शिव नागों के देवता है और नागेश्वर का अर्थ नागों का ईश्वर होता है भगवान शिव का एक नाम नागेश्वर होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कहा गया


कैसे जाए नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन को


नागेश्वर ज्योतिर्लिंग कैसे जाएं
नागेश्वर ज्योर्तिलिंग कैसे जाये


नागेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत में 3 स्थानों पर होने की बात सामने आती है परंतु गुजरात राज्य के नागेश्वर ज्योतिर्लिंग को ही असली ज्योतिर्लिंग माना जाता है यह ज्योतिर्लिंग भारत देश के गुजरात राज्य में द्वारका से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जोकि द्वारका के बाहर आता है इस स्थान पर पहुंचने के लिए कई माध्यमों से जाया जा सकता है
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थान देश के सभी राज्यों के राज्य मार्ग से जुड़ा हुआ है यहां पर आप बस टैक्सी या प्राइवेट कार से आसानी से आ सकते हैं

अगर आप लोग नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर के दर्शन के लिए ट्रेन से जाना चाहते हैं तो देश के कई राज्यों से द्वारका के लिए सीधी ट्रेनें चलती है इस मंदिर की दूरी द्वारका से कुल 17 किलोमीटर है अगर आपके शहर से द्वारका के लिए ट्रेन नहीं चलती है तो उसके बाद सबसे नजदीकी स्टेशन आपके लिए अहमदाबाद होगा क्योंकि अहमदाबाद से द्वारका के लिए निरंतर ट्रेनें चलती है द्वारका पहुंचने के बाद आप लोगों को द्वारका तीर्थ स्थान के दर्शन कर लेना है और वह पर आपको हॉट एवं  धर्मशाला उचित दामों पर बुक कर कर जो कि आपको आसानी से मिल जाएगी एक दिन वही पर रुक जाना है क्योंकि नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के पास रुकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है आप एक दिन में ही नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर कर वापस द्वारका आ सकते हैं द्वारका कैसे जाए द्वारका का महत्व क्या है और भगवान श्री कृष्ण की यह द्वारका कैसे डूबी थी इसके बारे में हमने पहले ही उस पर आर्टिकल लिखकर उचित जानकारी देने का आपको प्रयास किया है और आप लोगों ने वह नहीं पड़ी तो नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर कर आप उसे भी पढ़ सकते हैं 

विदेशी नागरिक कैसे आ सकते हैं नागेश्वर ज्योतिर्लिंग टेंपल


नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात कैसे जाए
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात कैसे जाए


अगर आप लोग नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने के लिए भारत देश के बाहर से यानी कि अदर कंट्री से आ रहे हैं तो आपके लिए सबसे उचित एयरपोर्ट अहमदाबाद होगा अहमदाबाद एयरपोर्ट से द्वारका जाने के लिए निरंतर ट्रेनिंग चलती रहती है और उसके साथ साथ आप अपने सुविधानुसार बस टैक्सी या प्राइवेट कार का भी चयन कर सकते हैं अगर आपके देश से अहमदाबाद के लिए फ्लाइट नहीं मिलती है तो आप लोगों को मुंबई के लिए आसानी से फ्लाइट मिल जाएगी मुंबई से अहमदाबाद की दूरी कुल 518 किलोमीटर है और इस दूरी को 8 घंटे 43 मिनट में पूरा किया जा सकता है
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर पहुंचते ही आपको मंदिर ट्रस्ट के काउंटर से प्रसाद लेकर लाइन में लग जाना है इस स्थान पर दर्शन के लिए ज्यादा भीड़ नहीं रहती है  1 घंटे के अंदर ही आपके दर्शन आसानी से हो जाएंगे परंतु श्रावण महीने में यहां पर अच्छी खासी भीड़ रहती है इस बात का आप लोग जरूर ध्यान रखें

अगर आप लोगों को हमारे द्वारा दी गई जानकारी उचित लगे तो हमारे वेबसाइट को जरूर फॉलो करें अगर आप के कुछ प्रश्न रह जाते हैं तो आप हमें कमेंट भी कर सकते हैं हम आपके प्रश्नों का जवाब देने का प्रयास जरूर करेंगे 

जय हिंद जय भारत




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