कैलाश पर्वत की मिस्ट्री नहीं चढ़ पाया इस पर आज तक कोई

 कैलाश पर्वत के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी


कैलाश मानसरोवर पर्वत का रहस्य
कैलाश पर्वत

कैलाश पर्वत को हिंदू धर्म में भगवान शिव का घर कहा गया है यह विशाल पर्वत शिव लिंग के आकार का दिखाई पड़ता है और यह आज तक दुनिया के लिए एक मिस्ट्री बनी हुुई है

हिंदू धर्म के साथ-साथ दुनिया के सभी धर्मों के लोग यहां पर कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए लाखों की संख्या में आते है

पौराणिक कथाओं के अनुसार मानसरोवर झील के निकट भगवान शिव का कैलाश पर्वत स्थित है
कैलाश पर्वत सबसे रहस्यमई धार्मिक और हिंदू धर्म के लिहाज से एक आस्था का केंद्र माना जाता है और यह अनंत शक्तियों का भंडार भी है कैलाश पर्वत   के साथ-साथ इस की परिक्रमा करने का बहुत महत्व है इसीलिए यहां पर देश-विदेश से लाखों की संख्या में लोग परिक्रमा पूरी करने के लिए कैलाश पर्वत की यात्रा पर आते हैं इस पर्वत की परिक्रमा लगाने का चलन हजारों वर्षों से चला आ रहा है बौद्ध धर्म और जैन धर्म के लोग इस पर्वत की परिक्रमा को खोरा कहते हैं और हिंदू धर्म में परिक्रमा कहते हैं इस पर्वत का एक परिक्रमा एक जीवन चक्र के बराबर माना जाता है जो जीवन में किए सभी पापों को धो देता है

इन परिक्रमा को लेकर कुछ तथ्य सामने आते हैं कहा जाता है कि 12 बार इस चमत्कारी और रहस्यमई पर्वत की परिक्रमा करने से पिछले जन्म की और इस जन्म के पापों से मनुष्य को मुक्ति मिल जाती है और 108 बार परिक्रमा करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है परंतु इस पर्वत का एक चक्कर लगाना ही बहुत कठिन है क्योंकि यहां तक पहुंचना ही बहुत कठिन माना जाता है कहा जाता है कि यह स्थान खतरों से भरा हुआ है

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आप लोगों को बता दें कि इसी स्थान पर मानसरोवर झील के अंदर माता पार्वती ने कई वर्षों तक भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कई वर्षों तक कठिन तपस्या की थी इस स्थान को आज गौरीकुंड के नाम से जाना जाता है जो कि माता पार्वती का एक अन्य नाम गौरी भी है

इस गौरीकुंड की कुल गहराई 80 फुट बताई जाती है जिस पर हमेशा बर्फ जमी होती है फिर भी भक्तजन इस बर्फ को हटाकर इसके निर्मल जल से स्नान करना नहीं भूलते है

कहा जाता है कि मानसरोवर झील की खोज महाराजा मांधाता ने की थी और कई वर्षों तक यहां पर तपस्या भी की थी कहा जाता है कि इस स्थान पर एक पेड़ मिलता है जिसके फल के सेवन से मनुष्य को सभी रोगों से मुक्ति मिल जाती है कहा जाता है कि यह वही कल्पवृक्ष है जो समुद्र मंथन के दौरान निकला था

कैलाश पर्वत की भौगोलिक स्थिति


कैलाश मानसरोवर झील
कैलाश मानसरोवर झील


यह कैलाश मानसरोवर पर्वत चीन देश के तिब्बत प्रांत के अंतर्गत आता है जो कि पहले यह भारत का हिस्सा था परंतु आज भी भारत से हर साल हजारों की संख्या में लोग कैलाश पर्वत की ओर मानसरोवर झील की यात्रा पर जाते हैं
इस पर्वत को अष्टापद ,गणपर्वत ,रजतगिरी भी कहा जाता है इसकी ऊंचाई 6638 मीटर है और फुट के हिसाब से देखें तो 21778 फुट है इसके पश्चिम तथा दक्षिण में मानसरोवर तथा राक्षसताल झील स्थित है मानसरोवर मीठे पानी की झील होने के साथ-साथ इस झील से होकर बड़ी बड़ी नदियां निकलती है जो कि दुनिया को अलग-अलग भागों में बांटती है जिनमें से ब्रह्मपुत्र सतलाज सिंधु और चिनाब जैसी बड़ी नदियां है
कैलाश पर्वत माला कश्मीर से लेकर कि भूटान तक फैली हुई है

क्या है कैलाश पर्वत की मिस्ट्री क्यों नहीं चढ़ पाया इस पर आज तक कोई


दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट की तुलना में कैलाश पर्वत छोटा है परंतु इतिहास गवाह है कि आज तक इस पर्वत पर कोई भी नहीं चढ़ा पाया है लगता है कि यह दुनिया के लिए पहले से ही एक मिस्ट्री थी और एक मिस्ट्री ही बन कर रहेगी वहीं माउंट एवरेस्ट पर आज तक 4000 से ज्यादा लोग चढ़ चुके हैं माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई 8850 मीटर है जोकि कैलाश पर्वत की तुलना में बहुत ज्यादा है कैलाश पर्वत पर न चढ़ पाने का रहस्यमई कारण यह बताया गया है कि कहा जाता है कि भगवान शिव स्वयं इस पर्वत के शीश पर तपस्या करते हैं और ध्यान में लीन रहते हैं कहा जाता है कि इस पर्वत पर कई बार पर्वत रोहीओने चढ़ने का प्रयास किया है परंतु वह असफल रहे हैं
इस पर्वत पर चढ़ते वक्त कई पर्वतारोहियों की जान भी जा चुकी है परंतु इस पर्वत पर चढ़ने में आज तक किसी को भी सफलता प्राप्त नहीं हुई है इसी के चलते चाइनीस सरकार ने इस पर्वत पर चढ़ने वाले सभी पर्वत रोही ऊपर हमेशा के लिए पाबंदी लगा दी गई है

कैलाश मानसरोवर पर्वत का इतिहास


यह रहस्यमई पर्वत मानसरोवर झील के निकट होने के कारण इसे कैलाश मानसरोवर पर्वत भी कहते हैं इसका उल्लेख शिव पुराण में भी मिलता है और इसे लेकर एक पौराणिक कथा भी सुनने में आती है जो कि इस प्रकार है
इस पौराणिक कथा के अनुसार कहा जाता है कि इस पर्वत का निर्माण स्वयं भगवान शिव ने किया था इस पर्वत पर कई राजा महाराजाओं ने दिग्विजय के दौरान विजय प्राप्त की थी जिनमें
श्री भक्त ईश्वर स्वामी मंगलेश्वर श्री ऋषभदेव भगवान के पुत्र भरत ने इस पर दिग्विजय के दौरान विजय प्राप्त की थी महाभारत काल में पांडवों के समय अर्जुन ने इस प्रदेश पर विजय प्राप्त की थी

कैसे जाए मानसरोवर पर्वत की यात्रा पर


हिंदू धर्म के साथ-साथ जैन और बौद्ध धर्म के लिए भी कैलाश मानसरोवर की यात्रा बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है भारत से और दुनिया से कई लोग लाखों की संख्या में मानसरोवर की यात्रा के लिए जाते हैं भारत से मानसरोवर की यात्रा के लिए जाने के लिए सबसे उत्तम मार्ग उत्तराखंड राज्य के पिथौरागढ़ के अस्कोट धारचूला खेत कालापानी लिपुलेख खिंड तकलाकोट
होकर गुजरता है और जो कि सबसे नजदीकी और सुगम रास्ता माना जाता है जिसकी दूरी  544   किलोमीटर मानी जाती है 
ताला कोर्ट ,कालापानी और लिपुलेख यह वही स्थान है जिसे आज नेपाल की सरकार ने अपना बताते हुए नेपाल की संसद में बिल पास कर लिया है जो कि एक नेपाली सरकार की तरफ से बहुत ही गलत कदम उठाया गया है इन स्थानों को लेकर नेपाल सरकार और भारत सरकार के बीच इन दिनों तनाव बढ़ा हुआ है क्योंकि यह तीनों स्थान भारत की सीमा के अंतर्गत आते हैं



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