जानिए पाकिस्तान के चमत्कारी कटासराज शिव मंदिर के बारे में

जानते हैं पाकिस्तान में स्थित हिंदू धर्म के चमत्कारी कटासराज शिव मंदिर के बारे में

कटासराज मंदिर पाकिस्तान
कटासराज मंदिर पाकिस्तान


हम आपको आज बताने वाले हैं पाकिस्तान में स्थित हिंदू धर्म के भगवान शिव के चमत्कारी कटास राज मंदिर के बारे में क्या है इस मंदिर का चमत्कार और इतिहास

दुनिया भर में भगवान शिव के प्राचीन और चमत्कारी हजारों मंदिर स्थित है इनमें से कई मंदिरों की स्थापना पृथ्वी की उत्पत्ति के समय की बताई जाती है और कुछ मंदिर तो ऐसे भी मिलते हैं जिन्हें कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं ही स्थापित किया था

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 या फिर वह स्वयं शिवलिंग के रूप में वहां पर विराजमान हुए थे ऐसे ही  मंदिरों में से एक हिंदू धर्म का शिव मंदिर पाकिस्तान मैं स्थित है जिसे कटास राज शिव मंदिर के नाम से जाना जाता है कहा जाता है कि  यहां पर हिंदू मुस्लिम दोनों साथ मिलकर भगवान शिव की सच्ची श्रद्धा और भावना से पूजा अर्चना करते हैं यह मंदिर पाकिस्तान के लाहौर से 280 किलोमीटर की दूरी पर चकवाला नामक गांव में स्थित है

यह मंदिर आज से हजारों वर्ष पुराना माना जाता है इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है कहा जाता है कि इसी स्थान पर पांडवों ने अपना वनवास काटा था आप लोगों को पता ही होगा कि महाभारत काल में पांडवों को 14 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास मिला था उस वनवास में से कहा जाता है कि पांडवों ने 4 वर्षों तक इस स्थान पर निवास किया था 

कैसे हुई कटास राज मंदिर की उत्पत्ति 


कटास राज शिव मंदिर पाकिस्तान
कटासराज मंदिर पाकिस्तान

 कहांजाता है कि कटास राज मंदिर यह स्थान भगवान शिव के आंसुओं से बना हुआ है यह मंदिर एक पर्वत पर स्थित है जिसकी ऊंचाई 2000 फीट है कटास राज का मतलब होता है आंसुओं से भरी हुई आंखें कहा जाता है कि जब माता पार्वती ने स्वयं को अग्नि कुंड में भस्म कर लिया तो भगवान शिव उनके  शरीर को लेकर ब्रह्मांड भर में तांडव नृत्य करने लगे और उस समय उनकी आंखों से दो आंसू टपके एक आंसू इस पर्वत पर गिरा जहां पर एक सरोवर या फिर झील बन गई जिसे कटासराज कहा जाता है और दूसरा आशु भारत में राजस्थान के पुष्कर में गिरा जहां पर पुष्कर नामक झील का निर्माण हुआ

कटास राज पर स्थित झील आज से 10 शताब्दी पूर्व बड़ी ही पवित्र मानी जाती थी इसी स्थान पर भगवान शिव का 1 ज्योतिर्लिंग मंदिर भी स्थित है उसके साथ साथ गुंबद हवेली भी स्थित है इस चमत्कारी मंदिर के दर्शन के लिए हिंदू धर्म को मानने वाले इसके साथ-साथ मुस्लिम धर्म के लोग भी भगवान शिव के इस चमत्कारी शिवलिंग के दर्शन करने के लिए आते हैं उनका मानना है कि इस शिवलिंग के दर्शन करने मात्र से उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती है इसी कारण वस पाकिस्तान में इस मंदिर को चमत्कारी कटासराज मंदिर कहा जाता है और हिंदू मुस्लिम दोनों ही धर्म के लोग बड़े ही भक्ति भाव से इस मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं

 परंतु पाकिस्तानी सरकार की तरफ से इस मंदिर की तरफ कई वर्षों से खासा ध्यान नहीं दिया गया है इसी कारणवश कटासराज पर स्थित भगवान शिव के आंसुओं से बनी हुई आश्चर्यजनक और चमत्कारी झील का पानी आज बदबूदार और दूषित हो गया है क्योंकि इस झील में  इस क्षेत्र  की कंपनियों में से निकलने वाला गंदा पानी इस झील में आकर मिल जाता है इसी कारणवश यह झील आज दूषित हो गई है

कटासराज मंदिर का इतिहास

कटासराज झील
कटास राज झील


इस मंदिर की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओं से हुई है यह बात तो आप लोग अभी तक जान चुके हैं और यह मंदिर आज से कितना पुराना है इसका भी अनुमान आप लोगों को हो गया होगा परंतु इसके अलावा इस मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दिनों में से कुल 4 वर्ष इसी स्थान पर बिताए थे और यहां पर उन्होंने 7 मंदिरों का निर्माण किया यह वही झील है जिस पर महाभारत काल में यक्ष का अधिपत्य था जहां पर पांडवों और यक्ष राज के मध्य इस सरोवर के जल को पीने के कारण वर्ष विवाद हुआ था
वह विवाद इस प्रकार था कि जंगल में भ्रमण करते वक्त द्रोपदी को प्यास लगती है इस कारणवश पांडवों में सबसे छोटे सहदेव जल की खोज में निकल जाते हैं और नजदीकी उसे यह झील नजर आती है और वह पानी पीने के लिए आगे बढ़ता है उसी वक्त अदृश्य रूप में यक्ष राज उसे चेतावनी देते हैं कि यह झील मेरी है तुम इसका पानी ग्रहण नहीं कर सकते सहदेव उनकी बातों को दरकिनार कर देता है और पानी पीने लगता है उसी वक्त सहदेव की मृत्यु हो जाती है

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कई देर तक सहदेव के ना आने के बाद उसकी खोज में नकुल भी निकल पड़ता है और नकुल भी वही गलती करता है जो सहदेव ने की थी वह भी यक्ष राज के बिना अनुमति के उस झील का पानी पी लेता है और वह भी मृत्यु को प्राप्त होता है इसी प्रकार एक एक कर कर भीम और अर्जुन भी अपने बल के घमंड में चूर होकर यक्ष राजके चेतावनी को दरकिनार करते हुए पानी पीने लगते हैं और सभी मृत्यु को प्राप्त होते हैं उसके बाद सबसे आखरी में जेष्ठ पांडु पुत्र युधिष्ठिर आते हैं और वह यक्ष राज से बड़े ही विनम्र से पूछते हैं कि आपने मेरे सभी भाइयों को क्यों मारा तभी यक्ष राज कहते हैं कि इसरो पर मेरा अधिपत्य है और मेरी अनुमति केे बिना इस सरोवर के जल को कोई ग्रहण नहीं कर सकता है अगर तुम मेरे कुछ प्रश्नों के उत्तर दे दो तो मैंं तुम्हारे एक भाई को जीवित कर सकता हूं और  तुम्हें इस जल को ग्रहण करने  की अनुमति भी देता हूं युधिष्ठिर उनके प्रश्नों के उत्तर देने के लिए तैयार हो गए और उन्होंने उनके सभी प्रश्नों के सही सही उत्तर दिए और इससे खुश होकर यक्ष राज ने उनके सभी भाइयों को पुनः जीवित कर दिया 

इसके बाद यक्ष राज ने स्वयं ही बताया कि मैं तुम्हारा ही पूर्वज हूं मुझे पता था कि मेरे कुल में तुम्हारे जैसा धर्मात्मा जन्म लेगा इसीलिए मैं इस स्थान पर तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए कई वर्षों से तुम्हारा इंतजार कर रहा था और आज मेरा इंतजार खत्म हुआ और मुझे मेरे प्रश्नों के सही उत्तर भी मिल गए इसलिए मैं अब इस सरोवर को मुक्त करता हूं और उन्हें उनके प्रश्नों के उत्तरों के साथ ही इस युग से मुक्ति मिल गई

और इसके पश्चात पांडवों ने उसी स्थान पर 4 वर्षों तक रुक कर यहां पर 7 मंदिरों का निर्माण किया एक कथा के अनुसार माना जाता है कि इस मंदिर में भगवान  शिव के शिवलिंग का निर्माण और स्थापना स्वयं पांडवों ने की थी

आशा करते हैं कि आप को दी गई जानकारी पसंद आई होगी

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