रहस्य और चमत्कारों से भरा पड़ा है जगन्नाथ पुरी मंदिर

जगन्नाथ पुरी मंदिर


जगन्नाथ पुरी
जगन्नाथ पुरी मंदिर

हमारे भारत देश में रहस्य और चमत्कारों से कई मंदिर भरे पड़े हैं जिनमें से हर मंदिर का अलग रहस्य और अनोखी चमत्कारिक कथाएं है ऐसे मंदिरों में से एक मंदिर जगन्नाथ पुरी का  भी है यह मंदिर भगवान विष्णु के कृष्ण अवतार के रूप में पूजा जाता है और जगन्नाथपुरी को पृथ्वी का वैकुंठ भी कहते हैं

हमारे हिंदू धर्म में चार धामों की यात्रा का बड़ा महत्व माना जाता है आप लोगों को बता दें कि इन्हीं चार धामों में से एक धाम जगन्नाथपुरी कहलाता है

जगन्नाथ पुरी यह मंदिर भगवान कृष्ण का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां पर भगवान कृष्ण अपने बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा के साथ निवास करते हैं
आपको बता दें कि यह जगन्नाथ पुरी मंदिर हमारे भारत देश के पूर्व में पूरी नामक शहर के अंतर्गत आता है जहां पर भगवान श्री कृष्ण के दर्शन के लिए रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है यह मंदिर अपने अनोखे चमत्कारों के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है जो भी भक्त इस मंदिर में दर्शन के लिए आता है वह इस मंदिर के रहस्य और चमत्कारों को देखकर आश्चर्यचकित हो जाता है कहा जाता है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक भी आज तक इस मंदिर के रहस्य और चमत्कारों का पता नहीं लगा पाए हैं

चलिए जानते हैं इस मंदिर के रहस्य और चमत्कारों के बारे मे


जगन्नाथ पुरी
जगन्नाथ पुरी


इस मंदिर के चमत्कारों को जो भी अपनी आंखों से देखता है उसे खुद भी अपनी आंखों पर विश्वास नहीं होता है कुछ ऐसे ही चमत्कार है जो हम आपको बताने जा रहे हैं
नंबर 1
यह मंदिर पुरी शहर में समुद्र के किनारे पर स्थित है इस मंदिर की चमत्कारिक विशेषता यह है कि कोई भी इस मंदिर में दर्शन करने जाता है तो उसे मंदिर के भीतर समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई नहीं देती है जैसे ही मंदिर के बाहर एक कदम भी रखा जाए तो समुद्र की लहरों की आवाज सुनाई देनी शुरू हो जाती है यह आज भी एक रहस्य बना हुआ है

नंबर 2

भगवान जगन्नाथ पुरी के मंदिर में भक्तों के लिए तैयार किया गया प्रसाद कभी खत्म नहीं होता है चाहे 10 20 हजार लोग हो या फिर एक लाख यहां पर आने वाले सभी भक्तों को प्रसाद अवश्य मिलता है इस मंदिर का प्रसाद तभी खत्म होता है जब मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाते हैं इस मंदिर की रसोई भी बड़ी अजीब है जहां पर प्रतिदिन आने वाले भक्तों के लिए प्रसाद बनाया जाता है जो कि मिट्टी के  मटको  मैं बनाया जाता है और खास बात यह है कि इन मिट्टी के 7 बर्तनों को एक के ऊपर एक साथ  चढ़ाकर पकने के लिए रखा जाता है और चमत्कार यह है कि सबसे ऊपर रखा हुआ मटकी में प्रसाद सबसे पहले पकता है और उसके बाद एक एक कर कर नीचे वाले मटके का प्रसाद पकना शुरू होते हैं इस प्रसाद को बनाने के लिए मंदिर संस्थान की ओर से पासो कारागीर और 300 सहकारी मिलकर कार्य करते हैं यानी कि प्रतिदिन मिलकर कुल 800 लोग प्रसाद तैयार करते हैं

नंबर 3

भगवान भगवान जगन्नाथ के मंदिर में आज भी ऐसे कई चमत्कार होते हैं जिसे देखकर विज्ञान भी हैरान है पुराणों के अनुसार जगन्नाथपुरी को पृथ्वी का बैकुंठ कहा गया है कहा जाता है कि भगवान श्री कृष्णा आज भी अपने भाई और बहन के साथ यहां पर निवास करते हैं यह मंदिर हजारों वर्षों से भगवान कृष्ण जगन्नाथपुरी के रूप में यहां के सबर जनजाति के लोगों के आराध्य देव है कहा जाता है कि किसी कारणवश इस मंदिर में भगवान विष्णु का रूप बाकी के मंदिरों के तुलना में अलग नजर आता है उसकी एक विशेष कहानी है जो हम आगे जानेंगे

इस मंदिर का सबसे बड़ा चमत्कार यह है कि इस मंदिर का ध्वज रोज बदल जाता है और हवा की विपरीत दिशा में लहराता है जिसका जवाब दुनिया के किसी भी वैज्ञानिक के पास नहीं है ऐसा क्यों है या एक आज भी रहस्य बना हुआ है और लोग इसे भगवान विष्णु का चमत्कार मानते हैं यह मंदिर भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जिस मंदिर का ध्वज रोज बदला जाता है कहा जाता है कि अगर इस मंदिर का ध्वज एक दिन अगर नहीं बदला जाए तो यह मंदिर 18 वर्ष के लिए बंद हो जाएगा इस कारणवश इस मंदिर का ध्वज रोज बदला जाता है

जगन्नाथ पुरी मंदिर
जगन्नाथ पुरी मंदिर


नंबर 4
मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र लगा हुआ है सुदर्शन चक्र की खास बात यह है कि किसी भी दिशा में खड़े रहकर देखा जाए तो ऐसा लगता है कि इस चक्र का मुंह हमारे ही तरफ है यह भी आज तक एक रहस्य बना हुआ है एक रास्ता यह भी है कि इस मंदिर की परछाई कभी भी दिखाई नहीं पड़ती है कहा यह भी जाता है कि यह मंदिर जितना ऊंचा है उतना ही जमीन के अंदर गहरा भी है किस मंदिर के तहखाने में सोने चांदी रत्ना के रूप में करोड़ों की संपत्ति होने का अनुमान भी बताया जाता है

चलिए जानते हैं इस मंदिर के निर्माण की कथा के बारे में


माना जाता है कि सातवीं सदी में इस मंदिर का निर्माण हुआ था परंतु इस मंदिर को कई बार थोड़ा भी गया है 1174 में अनंग भीमदेव ने दोबारा इस मंदिर का निर्माण करवाया था वैसे तो यह पूरा मंदिर ही रहस्य से भरा पड़ा है कहा जाता है कि राजा इंद्र देव मन मालवा का राजा था इन्हें भगवान जगन्नाथ के दर्शन सपने में ही हुए थे भगवान जगन्नाथ ने उनसे सपने में कहा कि  नीलांचल पर्वत की एक गुफा में मेरी एक मूर्ति है जो नीलमाधव के नाम से जानी जाती है तुम उस मूर्ति को वहां से निकाल कर लाओ और एक मंदिर बनवा कर उसकी स्थापना करो राजा ने तुरंत ही नीलांचल पर्वत की खोज में अपने सैनिकों को भेजा परंतु वहां पर नीलमाधव की पूजा सबर जनजाति के लोग क्या करते थे क्योंकि वह लोग उन्हें अपना आराध्य मानते हैं राजा के सैनिकों ने उस गुफा से मूर्ति को तो चुरा लिया परंतु यह बात भगवान नीलमाधव को अच्छी नहीं लगी है और वह क्रोधित होकर पुनः उसी गुफा में वापस चले गए और राजा से कहा तुम पहले मेरे लिए एक विशाल मंदिर बनवाओ और मैं तुम्हें वचन देता हूं मैं तुम्हारे पास लौट कर वापस जरूर आऊंगा

कुछ दिनों बाद राजा ने भगवान के लिए एक विशाल मंदिर बनवाया और भगवान से उस मंदिर में विराजित होने के लिए कहा तब भगवान ने उनसे कहा कि द्वारिका से एक पेड़ का का टुकड़ा तैरते हुए पूरी की ओर आ रहा है तुम उस पेड़ के टुकड़े को वहां से उठा कर लाओ और उसी से मेरी मूर्ति का निर्माण करो राजा ने अपने सैनिकों को उस पेड़ के टुकड़े को लेने के लिए भेजा परंतु वह सभी मिलकर उसे उठाना सके फिर राजा के समझ में आ गया कि भगवान नीलमाधव सबर जनजाति के आराध्य अभी राजा ने सबर जनजाति के मुखिया को बुलवाया और वह अकेले ही उस लकड़ी के टुकड़े को उठा कर ले आए उस लकड़ी के टुकड़े से मूर्ति बनाते वक्त राजा के कुशल कारागीर लाख कोशिशों के बावजूद उस लकड़ी में एक छेद भी नहीं कर सके

तभी वहां पर तीनों लोगों के भगवान विश्वकर्मा एक बुजुर्ग व्यक्ति के रूप में उपस्थित हुए और उन्होंने राजा से शर्त रखी कि मैं इससे मूर्ति तैयार कर सकता हूं परंतु मेरी शर्त यह है कि मैं इस मूर्ति का निर्माण 21 दिनों में करूंगा और वह भी अकेला राजा ने उनकी यह शर्त मान ली और एक बंद कमरे में भगवान विश्वकर्मा उस मूर्ति  का निर्माण करते रहे परंतु एक दिन राजा की पत्नी से रहा नहीं गया उन्होंने एक दिन अचानक जिस कमरे में मूर्ति निर्माण का कार्य चल रहा था उसको खोल कर देखा तब वहां से वह बुजुर्ग गायब हो चुका था और मूर्तियों का निर्माण अधूरा था कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने ही भगवान कृष्ण उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की अधूरी मूर्ति बनाई थी जिनके हाथ पैर नहीं थे

राजा ने इसे ईश्वर की इच्छा मानकर इन मूर्तियों को मंदिर में स्थापित करवा दिया इस प्रकार पूरी नामक स्थान पर जगन्नाथ स्वामी के नाम से इस मंदिर में भगवान श्री कृष्णा उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा की मूर्तियों की स्थापना हुई ऐसा माना जाता है
 और इन अनिल माधव के नाम से ही जाना जाता है

कैसे जाए जगन्नाथपुरी 

जगन्नाथपुरी राजस्थान हमारे भारत के पूर्व राज्य में पुरी नामक शहर में स्थित है यहां पवित्र स्थान देश के सभी राज्य मार्गों से जुड़ा हुआ है यहां पर आप लोग डायरेक्ट बस सेवा कार सेवा के माध्यम से आसानी से पहुंच सकते हैं

देश के कई राज्यों से पुरी के लिए डायरेक्ट ट्रेन चलती है रेल मार्ग से भी यह स्थान जुड़ा हुआ है अगर आप शहर से पूरी के लिए डायरेक्ट ट्रेन नहीं मिलती है तो इसकी नजदीकी रेलवे स्टेशन भुवनेश्वर के लिए देश के सभी राज्यों के बड़े रेलवे स्टेशनों से ट्रेन आसानी से मिल जाएगी भुवनेश्वर शहर उड़ीसा राज्य की राजधानी है
अगर आप लोग फ्लाइट से जाना चाहे तो आपको भुवनेश्वर के लिए फ्लाइट बुक करनी होगी क्योंकि पुरी का सबसे नजदीकी एयरपोर्ट भुवनेश्वर ही माना जाता है पुरी के रेलवे स्टेशन से मंदिर की कुल दूरी ढाई किलोमीटर है जिसे कुल 9 मिनटों में तय किया जा सकता है भुवनेश्वर से पुरी की दूरी कुल 64 किलोमीटर है जो कि एक घंटा 24 मिनट में पूरी की जा सकती है

आशा करते हैं आप लोगों को दी गई जानकारी पसंद आई होगी

जय हिंद जय भारत

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